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76082 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Vandami mataji ????? 2026-04-11 06:41:11
76081 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Vandami mataji ????? 2026-04-11 06:41:10
76080 48340398 ???गुरु भगवान??? *मैं हूँ ना❤️❤️❤️* *?गुरूदेव से जुड़े रहें, अभी Follow करें❤️”* 2026-04-11 06:39:32
76079 48340398 ???गुरु भगवान??? *मैं हूँ ना❤️❤️❤️* *?गुरूदेव से जुड़े रहें, अभी Follow करें❤️”* 2026-04-11 06:39:31
76077 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ *मैं हूँ ना❤️❤️❤️* *?गुरूदेव से जुड़े रहें, अभी Follow करें❤️”* 2026-04-11 06:39:29
76078 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ *मैं हूँ ना❤️❤️❤️* *?गुरूदेव से जुड़े रहें, अभी Follow करें❤️”* 2026-04-11 06:39:29
76076 40449749 जिनोदय?JINODAYA *कर्म का न्याय—जब लौटता है तो पीढ़ियाँ याद रखती हैं* दूसरों का जीवन छिन्न-भिन्न करने वालों को शायद उस समय यह एहसास नहीं होता कि वे सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार, उसकी आशाओं, उसके सपनों और उसकी आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित कर रहे हैं। स्वार्थ, अहंकार और क्षणिक लाभ के लिए जब कोई किसी के जीवन में अंधकार भरता है, तो वह यह भूल जाता है कि इस सृष्टि में कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता। हर कर्म का लेखा-जोखा होता है, और समय आने पर उसका फल अवश्य मिलता है। जैन दर्शन स्पष्ट रूप से कहता है कि कर्म एक ऐसी सूक्ष्म शक्ति है, जो हमारे प्रत्येक विचार, वचन और कार्य से बंधती है। जब हम किसी के साथ अन्याय करते हैं, किसी का दिल दुखाते हैं या किसी के जीवन को जानबूझकर नुकसान पहुँचाते हैं, तब हम न केवल पाप कर्म का बंध करते हैं, बल्कि अपने भविष्य के दुखों का बीज भी बोते हैं। उस समय भले ही हमें सफलता, शक्ति या विजय का भ्रम हो, लेकिन यह भ्रम अधिक समय तक टिकता नहीं। इतिहास और अनुभव दोनों गवाही देते हैं कि जब कर्म लौटता है, तो वह अकेले नहीं आता। वह अपने साथ ऐसी परिस्थितियाँ लेकर आता है, जो व्यक्ति को भीतर तक तोड़ देती हैं। जिस प्रकार किसी को रुलाकर मिली हुई खुशी कभी स्थायी नहीं हो सकती, उसी प्रकार दूसरों को गिराकर बनाई गई ऊँचाई भी अधिक समय तक टिक नहीं पाती। जब कर्म का चक्र घूमता है, तो वही व्यक्ति, वही परिवार, और कई बार उसकी आने वाली पीढ़ियाँ भी उसके परिणामों को भोगती हैं। यह कोई डराने वाली बात नहीं, बल्कि प्रकृति का अटल नियम है। जैसे बीज बोया जाता है, वैसा ही फल प्राप्त होता है। यदि हम कांटे बोएंगे तो फूलों की उम्मीद करना मूर्खता है। इसलिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि किसी का जीवन बर्बाद करके कभी भी स्वयं का कल्याण नहीं किया जा सकता। जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं, वे अक्सर स्वयं उसी में गिरते हैं—बस समय का अंतर होता है। समाज में आज अनेक ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहाँ लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की खुशियाँ छीन लेते हैं, रिश्तों को तोड़ देते हैं और निर्दोष लोगों को पीड़ा पहुँचाते हैं। ऐसे लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि कर्म का न्याय देर से जरूर होता है, लेकिन अंधा नहीं होता। जब वह न्याय करता है, तो इतना गहरा प्रभाव छोड़ता है कि व्यक्ति ही नहीं, उसकी आने वाली पीढ़ियाँ भी उस दर्द को महसूस करती हैं। इसलिए जीवन में हमेशा यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे कारण किसी की आँखों में आँसू न आएं। यदि हम किसी का भला नहीं कर सकते, तो कम से कम उसका बुरा भी न करें। यही सच्चा धर्म है, यही सच्ची मानवता है। दूसरों के जीवन में सुख, शांति और सहयोग का कारण बनना ही वह मार्ग है, जो हमें अच्छे कर्मों की ओर ले जाता है और हमारे भविष्य को सुरक्षित बनाता है। अंत में बस इतना ही कहना उचित है—दूसरों का जीवन छिन्न-भिन्न करने वालों, याद रखो कि जब कर्म लौटना शुरू होता है, तो उसकी आहट इतनी भयावह होती है कि सात पीढ़ियाँ बैठकर रोती हैं। इसलिए समय रहते संभल जाओ, क्योंकि कर्म का न्याय निश्चित है और उससे बचना किसी के बस में नहीं। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-11 06:34:32
76075 40449749 जिनोदय?JINODAYA *कर्म का न्याय—जब लौटता है तो पीढ़ियाँ याद रखती हैं* दूसरों का जीवन छिन्न-भिन्न करने वालों को शायद उस समय यह एहसास नहीं होता कि वे सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार, उसकी आशाओं, उसके सपनों और उसकी आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित कर रहे हैं। स्वार्थ, अहंकार और क्षणिक लाभ के लिए जब कोई किसी के जीवन में अंधकार भरता है, तो वह यह भूल जाता है कि इस सृष्टि में कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता। हर कर्म का लेखा-जोखा होता है, और समय आने पर उसका फल अवश्य मिलता है। जैन दर्शन स्पष्ट रूप से कहता है कि कर्म एक ऐसी सूक्ष्म शक्ति है, जो हमारे प्रत्येक विचार, वचन और कार्य से बंधती है। जब हम किसी के साथ अन्याय करते हैं, किसी का दिल दुखाते हैं या किसी के जीवन को जानबूझकर नुकसान पहुँचाते हैं, तब हम न केवल पाप कर्म का बंध करते हैं, बल्कि अपने भविष्य के दुखों का बीज भी बोते हैं। उस समय भले ही हमें सफलता, शक्ति या विजय का भ्रम हो, लेकिन यह भ्रम अधिक समय तक टिकता नहीं। इतिहास और अनुभव दोनों गवाही देते हैं कि जब कर्म लौटता है, तो वह अकेले नहीं आता। वह अपने साथ ऐसी परिस्थितियाँ लेकर आता है, जो व्यक्ति को भीतर तक तोड़ देती हैं। जिस प्रकार किसी को रुलाकर मिली हुई खुशी कभी स्थायी नहीं हो सकती, उसी प्रकार दूसरों को गिराकर बनाई गई ऊँचाई भी अधिक समय तक टिक नहीं पाती। जब कर्म का चक्र घूमता है, तो वही व्यक्ति, वही परिवार, और कई बार उसकी आने वाली पीढ़ियाँ भी उसके परिणामों को भोगती हैं। यह कोई डराने वाली बात नहीं, बल्कि प्रकृति का अटल नियम है। जैसे बीज बोया जाता है, वैसा ही फल प्राप्त होता है। यदि हम कांटे बोएंगे तो फूलों की उम्मीद करना मूर्खता है। इसलिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि किसी का जीवन बर्बाद करके कभी भी स्वयं का कल्याण नहीं किया जा सकता। जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं, वे अक्सर स्वयं उसी में गिरते हैं—बस समय का अंतर होता है। समाज में आज अनेक ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहाँ लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की खुशियाँ छीन लेते हैं, रिश्तों को तोड़ देते हैं और निर्दोष लोगों को पीड़ा पहुँचाते हैं। ऐसे लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि कर्म का न्याय देर से जरूर होता है, लेकिन अंधा नहीं होता। जब वह न्याय करता है, तो इतना गहरा प्रभाव छोड़ता है कि व्यक्ति ही नहीं, उसकी आने वाली पीढ़ियाँ भी उस दर्द को महसूस करती हैं। इसलिए जीवन में हमेशा यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे कारण किसी की आँखों में आँसू न आएं। यदि हम किसी का भला नहीं कर सकते, तो कम से कम उसका बुरा भी न करें। यही सच्चा धर्म है, यही सच्ची मानवता है। दूसरों के जीवन में सुख, शांति और सहयोग का कारण बनना ही वह मार्ग है, जो हमें अच्छे कर्मों की ओर ले जाता है और हमारे भविष्य को सुरक्षित बनाता है। अंत में बस इतना ही कहना उचित है—दूसरों का जीवन छिन्न-भिन्न करने वालों, याद रखो कि जब कर्म लौटना शुरू होता है, तो उसकी आहट इतनी भयावह होती है कि सात पीढ़ियाँ बैठकर रोती हैं। इसलिए समय रहते संभल जाओ, क्योंकि कर्म का न्याय निश्चित है और उससे बचना किसी के बस में नहीं। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-11 06:34:31
76073 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 06:33:45
76074 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 06:33:45