| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 222331 |
50892187 |
श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर |
|
|
|
|
2026-06-11 16:39:47 |
|
| 222329 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
|
|
|
|
2026-06-11 16:37:37 |
|
| 222330 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
|
|
|
|
2026-06-11 16:37:37 |
|
| 222327 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
|
|
|
|
2026-06-11 16:27:34 |
|
| 222328 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
|
|
|
|
2026-06-11 16:27:34 |
|
| 222326 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
|
|
*।। जिनागम पंथ जयवंत हो ।।*
*श्रुत पंचमी महापर्व के पावन अवसर पर भारत की राजधानी दिल्ली में प्रथम बार रचेगा इतिहास ! ?♂️*
*?जब यहां भावलिंगी संत के करकमलों से आपके बालक बालिकाओं के मास्तक पर होंगे सरस्वती मंत्र बीज संस्कार…*
*☀️”श्रुतम्”☀️*
॰ रजिस्ट्रेशन शीघ्र करें…
?<a href="https://forms.gle/J5UNYcbGfrzh1JmZ7" target="_blank">https://forms.gle/J5UNYcbGfrzh1JmZ7</a>
*?️दिनांक :19 जून 2026, शुक्रवार, प्रात: 10:00 बजे*
*?स्थान: विवान बेंक्वट हॉल, CBD ग्राउंड, दिल्ली*
*• रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।*
*• रजिस्ट्रेशन करने के लिए QR स्कैन करें ।*
*• 8 वर्ष से 25 वर्ष तक के बालक / बालिकाओं के लिये।*
*• ड्रेस कोड : वाईट (अनिवार्य)*
*निवेदक : सकल दिगम्बर जैन समाज एवं महिला समाज, कृष्णा नगर, दिल्ली*
*संयोजक : आचार्य श्री विमर्शसागर गुरुभक्त परिवार, दिल्ली* |
|
2026-06-11 16:25:16 |
|
| 222325 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
|
|
*।। जिनागम पंथ जयवंत हो ।।*
*श्रुत पंचमी महापर्व के पावन अवसर पर भारत की राजधानी दिल्ली में प्रथम बार रचेगा इतिहास ! ?♂️*
*?जब यहां भावलिंगी संत के करकमलों से आपके बालक बालिकाओं के मास्तक पर होंगे सरस्वती मंत्र बीज संस्कार…*
*☀️”श्रुतम्”☀️*
॰ रजिस्ट्रेशन शीघ्र करें…
?<a href="https://forms.gle/J5UNYcbGfrzh1JmZ7" target="_blank">https://forms.gle/J5UNYcbGfrzh1JmZ7</a>
*?️दिनांक :19 जून 2026, शुक्रवार, प्रात: 10:00 बजे*
*?स्थान: विवान बेंक्वट हॉल, CBD ग्राउंड, दिल्ली*
*• रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।*
*• रजिस्ट्रेशन करने के लिए QR स्कैन करें ।*
*• 8 वर्ष से 25 वर्ष तक के बालक / बालिकाओं के लिये।*
*• ड्रेस कोड : वाईट (अनिवार्य)*
*निवेदक : सकल दिगम्बर जैन समाज एवं महिला समाज, कृष्णा नगर, दिल्ली*
*संयोजक : आचार्य श्री विमर्शसागर गुरुभक्त परिवार, दिल्ली* |
|
2026-06-11 16:25:15 |
|
| 222323 |
40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
|
|
जैन ग्रंथों में 'मतंग वंश' के सबूत... जहां सिर्फ रेफरेंस के लिए मतंग का ज़िक्र है, वहां इसका ज़िक्र क्यों नहीं किया गया? ऐसा सवाल उठ सकता है। और यह सही भी हो सकता है। उस सवाल का जवाब यह है कि जो रेफरेंस दिए गए हैं। मैंने उनका ज़िक्र आगे के अलग-अलग आर्टिकल में किया है। पढ़ने वाले उन्हें पढ़ पाएंगे; लेकिन जो लोग इस एक सवाल का जवाब चाहते हैं कि मतंग जैन परंपरा से कैसे जुड़े हैं? उनके लिए यह सुविधा शुरू में ही है। **** दूसरी बात यह है कि एक बार सबूत दे दिए जाने के बाद, बाद में जो लिखा जाएगा, उस पर कोई शक नहीं रहेगा। और एक तरह की फ्लेक्सिबिलिटी बनेगी। मुझे यह फ्लेक्सिबिलिटी बनाना ज़रूरी लगा। बेशक, अगर किसी के मन में दो पहले से बनी राय है, तो चाहे कितने भी और कैसे भी सबूत दिए जाएं, कोई हल नहीं है। विट्ठल साठे, जैन विचार मंच। ****
प्रेसिडेंट, श्री सुपार्श्वनाथ अहिंसा चैरिटेबल ट्रस्ट..
मतंग वंश जैन परंपरा का एक वंश है।
इसका सबूत जैन आगम, पुराने ग्रंथों में है।
उनमें से कुछ इस तरह हैं-
1) आचार्य श्री 108 धर्म भूपन ने 'जैन दर्शन गणित' नाम की एक किताब लिखी है।
उस किताब में, नंबर 158 पर पुराने राजवंशों के नाम भी दिए गए हैं।
2) सामन वंश 2) इशाकु वंश 3) उच वंश 4) ऋषि वंश 5) कुरु वंश 6) चंद्र वंश 7) नाथ वंश 8) भोज वंश 1) मतंग वंश 10) यादव वंश 11) राष्ट्र वंश 12) राक्षस वंश 13) वानर वंश 14) विधाथर वंश 15) श्री वंश
16) सूर्य वंश 17) सोम वंश 11) हरि वंश,
ऐसे अठारह राजवंश थे। उस राजवंश में, मतंग वंश का ज़िक्र है। 3) आचार्य जिनसेन की लिखी किताब 'हरिवंश पुराण' में सरमा 22 श्लोक 107 से 112 में लिखा है कि मतंग वंश कैसे बना।
जैन परंपरा के पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ के बाहुबली और भरत नाम के बेटे थे। इनमें से भरत का एक बेटा था जिसका नाम विनामि था।
विनामि के बेटे का नाम मतंग था। उनसे मतंग वंश शुरू हुआ। हरिवंश पुराण में इसका ज़िक्र है।
मतंग बहुत ताकतवर थे। उनके कई बेटे और पोते थे। वे सभी ताकतवर थे। जैन धर्म के इक्कीसवें तीर्थंकर निमिनाथ के राज में प्रसेनजित नाम का एक राजा हुआ (जाति में उन्हें प्रसेहित भी कहा जाता है।) प्रसेनजित भी बहुत ताकतवर था। प्रसेनजित का मतलब है 'मतंग वंश का सूरज'।
3) हरिवंश पुराण में मतंग शहर का ज़िक्र है। जैन धर्मग्रंथों में मतंगों का ज़िक्र इस तरह है....
9) मतंग वंश के कुछ लोग अपने हाथों पर साँप का निशान बनाते थे। 11) आचार्य की लिखी किताब 'जैन धर्म का मौलिक इतिहास'
ये लोग जिनके हाथों पर साँप का निशान था, बाद में नागवंश के नाम से जाने गए; लेकिन वे असल में मतंग थे।
इसी नाग वंश में जैन परंपरा के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ हुए। (रेफरेंस- मलिक 'धर्म मंगल',
एडिटर और राइटर लीलावती जैन) यह पूरी आर्य है
5) भगवान सुपार्श्वनाथ का यक्ष मतंग था। ऐसा एक रेफरेंस है।
(जैन धर्म का इतिहास, लेखक - बलभद्र जैन)
3) भगवान महावीर का यक्ष मतंग था।
7) पुणे हरिवोध बल. मतंग थे। पुणे हनीकेश बल भगवान महावीर के शिष्य थे। (रेफरेंस - श्रमण महावीर,
लेखक- मुनि नथमल)
1) चित्र और संदेशवाहक मतंग थे। (उत्तरायण सूत्र, आचार्य तुलसी) 10) वाराणसी के राजा भूतदत्त मतंग थे। हरिवन ने लिखा है। उस किताब में कई जगहों पर मतंग का ज़िक्र है। 12) स्वामी ममलचंद्र की लिखी किताब 'तत्नाकरंड' में इसका ज़िक्र है। 23) आचार्य रविषेण की लिखी किताब 'पाठपुराण' में इसका ज़िक्र है। इस किताब को मतंग का विधाघर कहा जाता है। 14) आचार्य तुलसी की लिखी जगहंग सूत्र में इसका ज़िक्र है। 15) जैन किताब में 'मतंग अध्याय' है। 16) कई जैन कहानियों में मतंग के किरदार हैं। 17) जैन आगम किताब में इसका ज़िक्र है। 14) यशसलिलकवगदु आधार सातव्यो मतंग में मतंग का ज़िक्र है। 15) आदिपुराण में मतंग राज कपि का ज़िक्र है। 15) जैन आगम ग्रंथों में (जैसा कि ऊपर बताया गया है), कई जगहों पर मतंग का ज़िक्र है। मुझे नहीं लगता कि सभी संदर्भों का ज़िक्र करने का कोई कारण है। क्या आपने सबूत के लिए एक संदर्भ दिया और कई दूसरे? मतंग जैन परंपरा से हैं। यह साबित हो चुका है। जो लोग इस बारे में सारी जानकारी चाहते हैं, उन्हें ऊपर दिए गए ग्रंथों को ओरिजिनल रूप में पढ़ना चाहिए। मैं अपने अगले आर्टिकल में इसका ज़िक्र करूँगा। शॉर्ट में: ऊपर दिए गए सभी सबूतों से, यह बात पक्की है कि मतंग वंश जैन परंपरा का एक वंश है। यह हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है। इसे बचाकर रखना हमारी ज़िम्मेदारी है। आइए हम अपनी जैन परंपरा पर गर्व से जिएं! |
|
2026-06-11 16:24:26 |
|
| 222324 |
40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
|
|
जैन ग्रंथों में 'मतंग वंश' के सबूत... जहां सिर्फ रेफरेंस के लिए मतंग का ज़िक्र है, वहां इसका ज़िक्र क्यों नहीं किया गया? ऐसा सवाल उठ सकता है। और यह सही भी हो सकता है। उस सवाल का जवाब यह है कि जो रेफरेंस दिए गए हैं। मैंने उनका ज़िक्र आगे के अलग-अलग आर्टिकल में किया है। पढ़ने वाले उन्हें पढ़ पाएंगे; लेकिन जो लोग इस एक सवाल का जवाब चाहते हैं कि मतंग जैन परंपरा से कैसे जुड़े हैं? उनके लिए यह सुविधा शुरू में ही है। **** दूसरी बात यह है कि एक बार सबूत दे दिए जाने के बाद, बाद में जो लिखा जाएगा, उस पर कोई शक नहीं रहेगा। और एक तरह की फ्लेक्सिबिलिटी बनेगी। मुझे यह फ्लेक्सिबिलिटी बनाना ज़रूरी लगा। बेशक, अगर किसी के मन में दो पहले से बनी राय है, तो चाहे कितने भी और कैसे भी सबूत दिए जाएं, कोई हल नहीं है। विट्ठल साठे, जैन विचार मंच। ****
प्रेसिडेंट, श्री सुपार्श्वनाथ अहिंसा चैरिटेबल ट्रस्ट..
मतंग वंश जैन परंपरा का एक वंश है।
इसका सबूत जैन आगम, पुराने ग्रंथों में है।
उनमें से कुछ इस तरह हैं-
1) आचार्य श्री 108 धर्म भूपन ने 'जैन दर्शन गणित' नाम की एक किताब लिखी है।
उस किताब में, नंबर 158 पर पुराने राजवंशों के नाम भी दिए गए हैं।
2) सामन वंश 2) इशाकु वंश 3) उच वंश 4) ऋषि वंश 5) कुरु वंश 6) चंद्र वंश 7) नाथ वंश 8) भोज वंश 1) मतंग वंश 10) यादव वंश 11) राष्ट्र वंश 12) राक्षस वंश 13) वानर वंश 14) विधाथर वंश 15) श्री वंश
16) सूर्य वंश 17) सोम वंश 11) हरि वंश,
ऐसे अठारह राजवंश थे। उस राजवंश में, मतंग वंश का ज़िक्र है। 3) आचार्य जिनसेन की लिखी किताब 'हरिवंश पुराण' में सरमा 22 श्लोक 107 से 112 में लिखा है कि मतंग वंश कैसे बना।
जैन परंपरा के पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ के बाहुबली और भरत नाम के बेटे थे। इनमें से भरत का एक बेटा था जिसका नाम विनामि था।
विनामि के बेटे का नाम मतंग था। उनसे मतंग वंश शुरू हुआ। हरिवंश पुराण में इसका ज़िक्र है।
मतंग बहुत ताकतवर थे। उनके कई बेटे और पोते थे। वे सभी ताकतवर थे। जैन धर्म के इक्कीसवें तीर्थंकर निमिनाथ के राज में प्रसेनजित नाम का एक राजा हुआ (जाति में उन्हें प्रसेहित भी कहा जाता है।) प्रसेनजित भी बहुत ताकतवर था। प्रसेनजित का मतलब है 'मतंग वंश का सूरज'।
3) हरिवंश पुराण में मतंग शहर का ज़िक्र है। जैन धर्मग्रंथों में मतंगों का ज़िक्र इस तरह है....
9) मतंग वंश के कुछ लोग अपने हाथों पर साँप का निशान बनाते थे। 11) आचार्य की लिखी किताब 'जैन धर्म का मौलिक इतिहास'
ये लोग जिनके हाथों पर साँप का निशान था, बाद में नागवंश के नाम से जाने गए; लेकिन वे असल में मतंग थे।
इसी नाग वंश में जैन परंपरा के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ हुए। (रेफरेंस- मलिक 'धर्म मंगल',
एडिटर और राइटर लीलावती जैन) यह पूरी आर्य है
5) भगवान सुपार्श्वनाथ का यक्ष मतंग था। ऐसा एक रेफरेंस है।
(जैन धर्म का इतिहास, लेखक - बलभद्र जैन)
3) भगवान महावीर का यक्ष मतंग था।
7) पुणे हरिवोध बल. मतंग थे। पुणे हनीकेश बल भगवान महावीर के शिष्य थे। (रेफरेंस - श्रमण महावीर,
लेखक- मुनि नथमल)
1) चित्र और संदेशवाहक मतंग थे। (उत्तरायण सूत्र, आचार्य तुलसी) 10) वाराणसी के राजा भूतदत्त मतंग थे। हरिवन ने लिखा है। उस किताब में कई जगहों पर मतंग का ज़िक्र है। 12) स्वामी ममलचंद्र की लिखी किताब 'तत्नाकरंड' में इसका ज़िक्र है। 23) आचार्य रविषेण की लिखी किताब 'पाठपुराण' में इसका ज़िक्र है। इस किताब को मतंग का विधाघर कहा जाता है। 14) आचार्य तुलसी की लिखी जगहंग सूत्र में इसका ज़िक्र है। 15) जैन किताब में 'मतंग अध्याय' है। 16) कई जैन कहानियों में मतंग के किरदार हैं। 17) जैन आगम किताब में इसका ज़िक्र है। 14) यशसलिलकवगदु आधार सातव्यो मतंग में मतंग का ज़िक्र है। 15) आदिपुराण में मतंग राज कपि का ज़िक्र है। 15) जैन आगम ग्रंथों में (जैसा कि ऊपर बताया गया है), कई जगहों पर मतंग का ज़िक्र है। मुझे नहीं लगता कि सभी संदर्भों का ज़िक्र करने का कोई कारण है। क्या आपने सबूत के लिए एक संदर्भ दिया और कई दूसरे? मतंग जैन परंपरा से हैं। यह साबित हो चुका है। जो लोग इस बारे में सारी जानकारी चाहते हैं, उन्हें ऊपर दिए गए ग्रंथों को ओरिजिनल रूप में पढ़ना चाहिए। मैं अपने अगले आर्टिकल में इसका ज़िक्र करूँगा। शॉर्ट में: ऊपर दिए गए सभी सबूतों से, यह बात पक्की है कि मतंग वंश जैन परंपरा का एक वंश है। यह हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है। इसे बचाकर रखना हमारी ज़िम्मेदारी है। आइए हम अपनी जैन परंपरा पर गर्व से जिएं! |
|
2026-06-11 16:24:26 |
|
| 222322 |
40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
|
|
|
|
2026-06-11 16:24:19 |
|