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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 67997 |
42709912 |
विद्या के कुन्थु (Vidya ke Kunthu) |
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<a href="https://youtube.com/shorts/B-_LMctfOaI?si=Ooge7PLE40Tc3iRQ" target="_blank">https://youtube.com/shorts/B-_LMctfOaI?si=Ooge7PLE40Tc3iRQ</a> |
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2026-04-06 06:18:07 |
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| 67998 |
42709912 |
विद्या के कुन्थु (Vidya ke Kunthu) |
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<a href="https://youtube.com/shorts/B-_LMctfOaI?si=Ooge7PLE40Tc3iRQ" target="_blank">https://youtube.com/shorts/B-_LMctfOaI?si=Ooge7PLE40Tc3iRQ</a> |
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2026-04-06 06:18:07 |
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| 67996 |
40476112 |
+120363390826692662 |
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*----दूसरी ढाल----*
ऐसे मिथ्यादृग-ज्ञानचरण,वश भ्रमत भरत दु:ख जन्म-मरण।
तातैं इनको तजिये सुजान, सुन तिन संक्षेप कहूँ बखान॥(1)
जीवादि प्रयोजनभूत तत्त्व, सरधै तिनमाँहि विपर्ययत्व।
चेतन को है उपयोग रूप, विन मूरति चिन्मूरति अनूप॥(2)
पुद्गल नभ धर्म अधर्म काल, इनतैं न्यारी है जीव-चाल।
ताकों न जान विपरीत मान, करि करै देह में निज पिछान॥(3)
मैं सुखी दुखी मैं रंक राव, मेरे धन गृह गोधन प्रभाव।
मेरे सुत तिय मैं सबल दीन, बेरूप सुभग मूरख प्रवीन॥(4)
तन उपजत अपनी उपज जान, तन नशत आपको नाश मान।
रागादि प्रगट जे दु:ख दैन, तिनही को सेवत गिनत चैन॥(5)
शुभ-अशुभ-बन्ध के फल मंझार,रति अरति करै निजपद विसार।
आतमहित-हेतु विराग-ज्ञान, ते लखें आपको कष्ट दान॥(6)
रोकी न चाह निज शक्ति खोय, शिवरूप निराकुलता न जोय।
याही प्रतीतिजुत कछुक ज्ञान, सो दु:खदायक अज्ञान जान॥(7)
इन जुत विषयनि में जो प्रवृत्त, ताको जानहु मिथ्याचरित्त।
यों मिथ्यात्वादि निसर्ग जेह, अब जे गृहीत सुनिये सु तेह॥(8)
जे कुगुरु कुदेव कुधर्म सेव, पोषैं चिर दर्शनमोह एव।
अन्तर रागादिक धरैं जेह, बाहर धन अम्बरतैं सनेह॥(9)
धारैं कुलिंग लहि महत-भाव, ते कुगुरु जन्म-जल-उपल-नाव।
जे रागद्वेष-मल करि मलीन, वनिता गदादिजुत चिह्न चीन।।(10)
ते हैं कुदेव तिनकी जु सेव, शठ करत न तिन भवभ्रमण-छेव।
रागादि-भाव हिंसा समेत, दर्वित त्रस-थावर मरन-खेत॥(11)
जे क्रिया तिन्हैं जानहु कुधर्म, तिन सरधै जीव लहै अशर्म।
याकूँ गृहीत मिथ्यात्व जान, अब सुन गृहीत जो है अज्ञान॥(12)
एकान्तवाद दूषित समस्त, विषयादिक-पोषक अप्रशस्त।
कपिलादिरचित श्रुत को अभ्यास, सो है कुबोध बहु देन त्रास॥(13)
जो ख्याति-लाभ पूजादि चाह, धरि करन विविध-विध देहदाह।
आतम अनात्म के ज्ञान-हीन, जे जे करनी तन करन-छीन॥(14)
ते सब मिथ्याचारित्र त्याग, अब आतम के हित-पन्थ लाग।
जगजाल भ्रमण को देहु त्याग, अब ‘दौलत’ निज आतम सुपाग।।(15) |
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2026-04-06 06:15:43 |
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| 67995 |
40476112 |
+120363390826692662 |
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*----दूसरी ढाल----*
ऐसे मिथ्यादृग-ज्ञानचरण,वश भ्रमत भरत दु:ख जन्म-मरण।
तातैं इनको तजिये सुजान, सुन तिन संक्षेप कहूँ बखान॥(1)
जीवादि प्रयोजनभूत तत्त्व, सरधै तिनमाँहि विपर्ययत्व।
चेतन को है उपयोग रूप, विन मूरति चिन्मूरति अनूप॥(2)
पुद्गल नभ धर्म अधर्म काल, इनतैं न्यारी है जीव-चाल।
ताकों न जान विपरीत मान, करि करै देह में निज पिछान॥(3)
मैं सुखी दुखी मैं रंक राव, मेरे धन गृह गोधन प्रभाव।
मेरे सुत तिय मैं सबल दीन, बेरूप सुभग मूरख प्रवीन॥(4)
तन उपजत अपनी उपज जान, तन नशत आपको नाश मान।
रागादि प्रगट जे दु:ख दैन, तिनही को सेवत गिनत चैन॥(5)
शुभ-अशुभ-बन्ध के फल मंझार,रति अरति करै निजपद विसार।
आतमहित-हेतु विराग-ज्ञान, ते लखें आपको कष्ट दान॥(6)
रोकी न चाह निज शक्ति खोय, शिवरूप निराकुलता न जोय।
याही प्रतीतिजुत कछुक ज्ञान, सो दु:खदायक अज्ञान जान॥(7)
इन जुत विषयनि में जो प्रवृत्त, ताको जानहु मिथ्याचरित्त।
यों मिथ्यात्वादि निसर्ग जेह, अब जे गृहीत सुनिये सु तेह॥(8)
जे कुगुरु कुदेव कुधर्म सेव, पोषैं चिर दर्शनमोह एव।
अन्तर रागादिक धरैं जेह, बाहर धन अम्बरतैं सनेह॥(9)
धारैं कुलिंग लहि महत-भाव, ते कुगुरु जन्म-जल-उपल-नाव।
जे रागद्वेष-मल करि मलीन, वनिता गदादिजुत चिह्न चीन।।(10)
ते हैं कुदेव तिनकी जु सेव, शठ करत न तिन भवभ्रमण-छेव।
रागादि-भाव हिंसा समेत, दर्वित त्रस-थावर मरन-खेत॥(11)
जे क्रिया तिन्हैं जानहु कुधर्म, तिन सरधै जीव लहै अशर्म।
याकूँ गृहीत मिथ्यात्व जान, अब सुन गृहीत जो है अज्ञान॥(12)
एकान्तवाद दूषित समस्त, विषयादिक-पोषक अप्रशस्त।
कपिलादिरचित श्रुत को अभ्यास, सो है कुबोध बहु देन त्रास॥(13)
जो ख्याति-लाभ पूजादि चाह, धरि करन विविध-विध देहदाह।
आतम अनात्म के ज्ञान-हीन, जे जे करनी तन करन-छीन॥(14)
ते सब मिथ्याचारित्र त्याग, अब आतम के हित-पन्थ लाग।
जगजाल भ्रमण को देहु त्याग, अब ‘दौलत’ निज आतम सुपाग।।(15) |
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2026-04-06 06:15:42 |
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| 67993 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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जयजिनेंद्रजी?
*हथेली तब भी छोटी थी,हथेली अब भी छोटी है!*
*पहले खुशियां बटोरने में वस्तु छूट जातीं थीं अब वस्तुएं बटोरने में खुशियां छूट जातीं हैं।*
सुप्रभात?
??इंडिया नहीं भारत बोलों?? |
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2026-04-06 06:15:37 |
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| 67994 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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जयजिनेंद्रजी?
*हथेली तब भी छोटी थी,हथेली अब भी छोटी है!*
*पहले खुशियां बटोरने में वस्तु छूट जातीं थीं अब वस्तुएं बटोरने में खुशियां छूट जातीं हैं।*
सुप्रभात?
??इंडिया नहीं भारत बोलों?? |
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2026-04-06 06:15:37 |
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| 67992 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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|
?प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर गुरवे नमो नमः?
?आचार्य गुरवे विद्यासागराय नमः?
??जयजिनेंद्रजी?
? *आज का नियम* ?
? *ऊँ ह्रीं अर्हम श्री पद्मप्रभनाथ जिनेंद्राय नमो नमः इस मंत्र की १ माला करें और आचार ग्रहण करने का त्याग*?
?सपरिवार नियम पालन करने वालों को विशेष धन्यवाद ?
?भूषण जैन?
?छोटे से नियम मुक्ति कीं आशा ?
?मोक्ष जाने कीं तीव्र अभिलाषा ?
*?आज का नियम पालन करने वाले कृपया नियम हैं लिखकर ग्रृप में भेजे?*
*तिथि-वैशाख कृष्ण चतुर्थी (४)*
*नोट:?एक नियम भी पालन कर सकते है* |
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2026-04-06 06:15:34 |
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| 67991 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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?प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर गुरवे नमो नमः?
?आचार्य गुरवे विद्यासागराय नमः?
??जयजिनेंद्रजी?
? *आज का नियम* ?
? *ऊँ ह्रीं अर्हम श्री पद्मप्रभनाथ जिनेंद्राय नमो नमः इस मंत्र की १ माला करें और आचार ग्रहण करने का त्याग*?
?सपरिवार नियम पालन करने वालों को विशेष धन्यवाद ?
?भूषण जैन?
?छोटे से नियम मुक्ति कीं आशा ?
?मोक्ष जाने कीं तीव्र अभिलाषा ?
*?आज का नियम पालन करने वाले कृपया नियम हैं लिखकर ग्रृप में भेजे?*
*तिथि-वैशाख कृष्ण चतुर्थी (४)*
*नोट:?एक नियम भी पालन कर सकते है* |
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2026-04-06 06:15:33 |
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| 67990 |
40476112 |
+120363390826692662 |
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जय जिनेन्द्र जी!!
दिनाँक: ०६/०४/२०२६
तिथि : वैशाख कृष्ण चतुर्थी, २५५२
दिन : सोमवार
कल्याणक:
आज *कद्दू/सीताफल/पेठा (pumpkin) खाने का त्याग और छहढाला की दूसरी ढाल पढ़ने का नियम* रखें।
कल का संभावित नियम- टॉफ़ी, चॉकलेट खाने का त्याग
अगर आप - आज १ दिन का नियम करना चाहते हैं तो देव-शास्त्र-गुरु का
स्मरण करते हुए संकल्प करें कि मै आज उपरोक्त नियम का पालन करुँगा/करूँगी।
?? *मेरे दोनों नियम हैं।*?? |
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2026-04-06 06:14:53 |
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| 67989 |
40476112 |
+120363390826692662 |
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जय जिनेन्द्र जी!!
दिनाँक: ०६/०४/२०२६
तिथि : वैशाख कृष्ण चतुर्थी, २५५२
दिन : सोमवार
कल्याणक:
आज *कद्दू/सीताफल/पेठा (pumpkin) खाने का त्याग और छहढाला की दूसरी ढाल पढ़ने का नियम* रखें।
कल का संभावित नियम- टॉफ़ी, चॉकलेट खाने का त्याग
अगर आप - आज १ दिन का नियम करना चाहते हैं तो देव-शास्त्र-गुरु का
स्मरण करते हुए संकल्प करें कि मै आज उपरोक्त नियम का पालन करुँगा/करूँगी।
?? *मेरे दोनों नियम हैं।*?? |
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2026-04-06 06:14:52 |
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