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71709 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-09 10:40:09
71710 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-09 10:40:09
71707 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? 2026-04-09 10:39:20
71708 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? 2026-04-09 10:39:20
71705 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-09 10:37:59
71706 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-09 10:37:59
71703 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 ಜಪಿಸು ಮಹಾಮಂತ್ರ ******************* ಕ್ಷಣ ಕ್ಷಣಕೂ ಸ್ಮರಿಸು ಣಮೋಕಾರ ಎರಗದಲ್ಲಿ ಅಘಗಳ ಚೀತ್ಕಾರ ಆಗುವುದು ಪುಣ್ಯಗಳ ಅಲಂಕಾರ ಇದುವೇ ಮೋಕ್ಷ ಮಾರ್ಗದ ಸಾಕಾರ ಭಾರತಿ ಗೋಗಿ, ಭದ್ರಾವತಿ 2026-04-09 10:37:18
71704 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 ಜಪಿಸು ಮಹಾಮಂತ್ರ ******************* ಕ್ಷಣ ಕ್ಷಣಕೂ ಸ್ಮರಿಸು ಣಮೋಕಾರ ಎರಗದಲ್ಲಿ ಅಘಗಳ ಚೀತ್ಕಾರ ಆಗುವುದು ಪುಣ್ಯಗಳ ಅಲಂಕಾರ ಇದುವೇ ಮೋಕ್ಷ ಮಾರ್ಗದ ಸಾಕಾರ ಭಾರತಿ ಗೋಗಿ, ಭದ್ರಾವತಿ 2026-04-09 10:37:18
71702 45644158 +120363403286452801 भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या क्योंकि इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा ....लेकिन वर्तमान में महाराष्ट्र के जैन मंत्री अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, और कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं? समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जैनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ?? देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा। प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं। कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन ??जैनम जयतु शासनम?? 2026-04-09 10:37:16
71701 45644158 +120363403286452801 भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या क्योंकि इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा ....लेकिन वर्तमान में महाराष्ट्र के जैन मंत्री अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, और कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं? समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जैनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ?? देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा। प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं। कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन ??जैनम जयतु शासनम?? 2026-04-09 10:37:15