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71289 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ आचार्यश्री पावनकीर्तिजी का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App <a href="https://kutumb.app/54afc40f0455?ref=JXPJH&amp;screen=settings_share" target="_blank">https://kutumb.app/54afc40f0455?ref=JXPJH&amp;screen=settings_share</a> 2026-04-09 08:39:37
71290 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ आचार्यश्री पावनकीर्तिजी का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App <a href="https://kutumb.app/54afc40f0455?ref=JXPJH&amp;screen=settings_share" target="_blank">https://kutumb.app/54afc40f0455?ref=JXPJH&amp;screen=settings_share</a> 2026-04-09 08:39:37
71287 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ ?स्वाध्याय भाग-१२ ?रत्नत्रय- जो कुशल मनुष्य रसायन के समान सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक् चारित्र इन तीन की सेवा करता है वह अमृत पद मोक्ष स्थान (पक्ष में पूर्ण नीरोग अवस्था) को प्राप्त होता है । जो ज्ञानी पुरुष भक्तिपूर्वक हर्ष से रत्नत्रय की विधि को करते हैं, वे उसके फल से मनुष्य और देवगति के अनुपम सुख प्राप्त कर महान् कठिन तप के द्वारा कर्मसमूह को नष्ट कर श्रीमल्लिनाथ तीर्थकर के समान तीनों लोकों के मनुष्यों से पूजा प्राप्त कर सिद्ध भगवन्तों से पूर्ण सिद्धगति को प्राप्त होते हैं । जो अनुपम गुणों का पिटारा है, त्रिलोकीनाथ तीर्थंकरों के द्वारा वन्दित है और संसाररूपी सर्प के लिए उत्तम मन्त्र है, ऐसा दिव्य रत्नत्रय मेरे समस्त पापों की हानि के लिए हो, पूर्ण रत्नत्रय की प्राप्ति के लिए हो तथा उत्कृष्ट सुबुद्धि के लिए हो। मैं उसकी वन्दना करता हूँ और स्तुति करता हूँ । रत्नत्रय के बिना सत्पुरुषों को कभी भी कहीं भी अनन्त सुख से परिपूर्ण सिद्धि- पद-मोक्ष नहीं प्राप्त होता है । राज्यभार रूप समुद्र में मग्न तथा अनेक चिन्ताओं में प्रवर्तमान गृहस्थों को कभी सारभूत दृढ़ रत्नत्रय नहीं हो सकता । सम्यग्दर्शन से दुर्गति का नाश होता है, निर्दोष ज्ञान से कीर्ति प्राप्त होती है, चारित्र से लोक में पूज्यता मिलती है परन्तु मोक्ष तीनों की एकता से ही प्राप्त होता है । सम्यक्त्व से उत्तम गति कही गयी है, ज्ञान से कीर्ति बतायी गई है, चारित्र से मनुष्य पूजा को प्राप्त होता है और तीनों से मोक्ष को प्राप्त होता है । सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक् चारित्र से विभूषित मनुष्य समस्त कर्मों को नष्ट कर निर्वाण को प्राप्त होते हैं । अहा ! धर्म की महिमा कितनी आश्चर्यकारक है ! जो महाभव्यजीव समीचीन रत्नत्रयरूप धर्म का आश्रय लेते हैं उन्हें यहाँ क्या दुर्लभ है ? अर्थात् कुछ भी नहीं । ✋शुभाशीर्वाद आर्षमार्ग संरक्षक प्रभावना प्रभाकर आगम दिवाकर आचार्य पावनकीर्ति 2026-04-09 08:39:34
71288 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ ?स्वाध्याय भाग-१२ ?रत्नत्रय- जो कुशल मनुष्य रसायन के समान सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक् चारित्र इन तीन की सेवा करता है वह अमृत पद मोक्ष स्थान (पक्ष में पूर्ण नीरोग अवस्था) को प्राप्त होता है । जो ज्ञानी पुरुष भक्तिपूर्वक हर्ष से रत्नत्रय की विधि को करते हैं, वे उसके फल से मनुष्य और देवगति के अनुपम सुख प्राप्त कर महान् कठिन तप के द्वारा कर्मसमूह को नष्ट कर श्रीमल्लिनाथ तीर्थकर के समान तीनों लोकों के मनुष्यों से पूजा प्राप्त कर सिद्ध भगवन्तों से पूर्ण सिद्धगति को प्राप्त होते हैं । जो अनुपम गुणों का पिटारा है, त्रिलोकीनाथ तीर्थंकरों के द्वारा वन्दित है और संसाररूपी सर्प के लिए उत्तम मन्त्र है, ऐसा दिव्य रत्नत्रय मेरे समस्त पापों की हानि के लिए हो, पूर्ण रत्नत्रय की प्राप्ति के लिए हो तथा उत्कृष्ट सुबुद्धि के लिए हो। मैं उसकी वन्दना करता हूँ और स्तुति करता हूँ । रत्नत्रय के बिना सत्पुरुषों को कभी भी कहीं भी अनन्त सुख से परिपूर्ण सिद्धि- पद-मोक्ष नहीं प्राप्त होता है । राज्यभार रूप समुद्र में मग्न तथा अनेक चिन्ताओं में प्रवर्तमान गृहस्थों को कभी सारभूत दृढ़ रत्नत्रय नहीं हो सकता । सम्यग्दर्शन से दुर्गति का नाश होता है, निर्दोष ज्ञान से कीर्ति प्राप्त होती है, चारित्र से लोक में पूज्यता मिलती है परन्तु मोक्ष तीनों की एकता से ही प्राप्त होता है । सम्यक्त्व से उत्तम गति कही गयी है, ज्ञान से कीर्ति बतायी गई है, चारित्र से मनुष्य पूजा को प्राप्त होता है और तीनों से मोक्ष को प्राप्त होता है । सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक् चारित्र से विभूषित मनुष्य समस्त कर्मों को नष्ट कर निर्वाण को प्राप्त होते हैं । अहा ! धर्म की महिमा कितनी आश्चर्यकारक है ! जो महाभव्यजीव समीचीन रत्नत्रयरूप धर्म का आश्रय लेते हैं उन्हें यहाँ क्या दुर्लभ है ? अर्थात् कुछ भी नहीं । ✋शुभाशीर्वाद आर्षमार्ग संरक्षक प्रभावना प्रभाकर आगम दिवाकर आचार्य पावनकीर्ति 2026-04-09 08:39:34
71286 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी जयजिनेंद्रजी? *असत्य के पांव नहीं होते मगर सबसे ज्यादा चलता वही है।* सुप्रभात? ??इंडिया नहीं भारत बोलों?? 2026-04-09 08:39:01
71285 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी जयजिनेंद्रजी? *असत्य के पांव नहीं होते मगर सबसे ज्यादा चलता वही है।* सुप्रभात? ??इंडिया नहीं भारत बोलों?? 2026-04-09 08:39:00
71283 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी जय जिनेंद्र 2026-04-09 08:38:11
71284 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी जय जिनेंद्र 2026-04-09 08:38:11
71281 40449658 ?शांतिधारा-पुणे? *✨ स्वर्ण प्राशन बिंदु (AYURVEDIC IMMUNIZATION) ✨* आने वाले रवि पुष्य नक्षत्र की शुभ तिथि: *23 अप्रैल एवं 24 अप्रैल* ब्रह्म मुहूर्त से करें अपने बच्चों को स्वर्णिम स्वास्थ्य की शुरुआत! ???????? *? निर्मित:* *शांतिधारा गिर गौ शाला एवं पंचगव्य अनुसंधान केंद्र* ⭐ प्रमुख फायदे: * रोग प्रतिरोधक क्षमता: तेज़ी से वृद्धि करता है। * शारीरिक और मानसिक विकास: बच्चों की वृद्धि में सहायक। * सुरक्षा कवच: मौसमी बीमारियों से रक्षा करता है। * पोषक तत्व: शरीर में पोषक तत्वों की कमी पूरी करता है। स्वर्ण प्राशन सेवन विधि (संक्षेप में): समय: प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र में ब्रह्म मुहूर्त से शुरू करके न्यूनतम 45 दिन तक या अधिकतम 6 माह तक लगातार दें। ज़रूरी निर्देश: देने से पूर्व एवं बाद में आधा घण्टे तक कुछ न दें। * उपयोग से पूर्व: जमा होने पर शीशी को 5-10 मिनट गुनगुने पानी में रखकर पिघला लें। (विस्तृत मात्रा (बूंद) चार्ट के लिए संपर्क करें) मात्रा एवं मूल्य: * 15ml: ₹1080 * 30ml: ₹2110 * 50ml: ₹3480 ?♂️?♀️ बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए, अभी ऑर्डर करें! ? हमसे जुड़ें: <a href="https://linktr.ee/shantidhara" target="_blank">https://linktr.ee/shantidhara</a> *? सीधा ऑर्डर लिंक:* <a href="https://shantidhara.in/products/ayurvedic-immunization-15ml" target="_blank">https://shantidhara.in/products/ayurvedic-immunization-15ml</a> (या www.shantidhara.in से भी खरीद सकते हैं।)* ? संपर्क करें: 6266486223, 8770637723 ????????? 2026-04-09 08:37:33
71282 40449658 ?शांतिधारा-पुणे? *✨ स्वर्ण प्राशन बिंदु (AYURVEDIC IMMUNIZATION) ✨* आने वाले रवि पुष्य नक्षत्र की शुभ तिथि: *23 अप्रैल एवं 24 अप्रैल* ब्रह्म मुहूर्त से करें अपने बच्चों को स्वर्णिम स्वास्थ्य की शुरुआत! ???????? *? निर्मित:* *शांतिधारा गिर गौ शाला एवं पंचगव्य अनुसंधान केंद्र* ⭐ प्रमुख फायदे: * रोग प्रतिरोधक क्षमता: तेज़ी से वृद्धि करता है। * शारीरिक और मानसिक विकास: बच्चों की वृद्धि में सहायक। * सुरक्षा कवच: मौसमी बीमारियों से रक्षा करता है। * पोषक तत्व: शरीर में पोषक तत्वों की कमी पूरी करता है। स्वर्ण प्राशन सेवन विधि (संक्षेप में): समय: प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र में ब्रह्म मुहूर्त से शुरू करके न्यूनतम 45 दिन तक या अधिकतम 6 माह तक लगातार दें। ज़रूरी निर्देश: देने से पूर्व एवं बाद में आधा घण्टे तक कुछ न दें। * उपयोग से पूर्व: जमा होने पर शीशी को 5-10 मिनट गुनगुने पानी में रखकर पिघला लें। (विस्तृत मात्रा (बूंद) चार्ट के लिए संपर्क करें) मात्रा एवं मूल्य: * 15ml: ₹1080 * 30ml: ₹2110 * 50ml: ₹3480 ?♂️?♀️ बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए, अभी ऑर्डर करें! ? हमसे जुड़ें: <a href="https://linktr.ee/shantidhara" target="_blank">https://linktr.ee/shantidhara</a> *? सीधा ऑर्डर लिंक:* <a href="https://shantidhara.in/products/ayurvedic-immunization-15ml" target="_blank">https://shantidhara.in/products/ayurvedic-immunization-15ml</a> (या www.shantidhara.in से भी खरीद सकते हैं।)* ? संपर्क करें: 6266486223, 8770637723 ????????? 2026-04-09 08:37:33