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70613 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ? *सभी को जय जिनेन्द्* ? एवम् परम पूज्य गुरूदेव विभंजन सागर जी मुनिराज का मंगल आशीर्वाद * आपके परिवार में* *सुख , शांति, शक्ति, सम्पति, स्वरुप, संयम, सादगी, सफलता, समृध्दि, साधना, संस्कार और स्वास्थ्य की वृद्धि हो*. ....... आज का दिन मंगलमय हो ।। * शास्त्रों में लिखा है हमे रोज़ एक नियम/त्याग लेना ही चाहिये। * सभी धर्मो में त्याग /नियम को बहुत महत्व दिया गया है । * त्याग / नियम कितना भी छोटा क्यों न हो (सिर्फ 10 मिनिट का भी) बहुत अशुभ कर्म नष्ट होते हैं। * रोज़ कुछ त्याग करने से बुरे कर्मो की निर्ज़रा (क्षय होना) होती है * नरक आयु का बंध अगर हमारा हो चुका है तो हम किसी भी तरह के नियम जीवन में नहीं ले पाते है। 09 अप्रैल 2026 दिन: गुरुवार "" आप चाहे तो सिर्फ के लिये त्याग/नियम भी ले सकते हैं या और कोई भी नियम अपने अनुसार ले सकते है। नियम- आज *भिन्डी* खाने का त्याग है और *श्री पुष्पदंत चालीसा* पढ़ने का नियम है..... ?? शहर में विराजित साधू संतो के दर्शन की और निरंतराय आहार की भावना रखे और हो सके तो दर्शन करके आहार भी दें। अगर आप आज 09-04-2026 एक दिन का संकल्प करना चाहते है तो आप "नियम है।! *********************************** *श्री पुष्पदन्त चालीसा* दुःख से तृप्त मरुस्थल भाव में, सघन वृक्ष सम छायाकार । पुष्पदन्त पद छत्र छाव में, हम आश्रय पावें सुखकार ।। जम्बू द्वीप के भरत क्षेत्र में, काकंदी नामक नगरी में । राज्य करें सुग्रीव बलधारी, जयराम रानी थी प्यारी ।। नवमी फाल्गुन कृष्ण बखानी, षोडश स्वपन देखती रानी । सूत तीर्थंकर गर्भ में आये, गर्भ कल्याणक देव मनाये ।। प्रतिपदा मंगसिर उजियारी, जन्मे पुष्पदंत हितकारी । जन्मोत्सव की शोभा न्यारी, स्वर्गपुरी सम नगरी प्यारी ।। आयु थी दो लक्ष पूर्व की, ऊंचाई शत एक धनुष की । थामी जब राज्य बागडोर, क्षेत्र वृद्धि हुई चहुँ और ।। इच्छाए थी उनकी सिमित, मित्र प्रभु के हुए असीमित । एक दिन उल्कापात देख कर, दृष्टिपात किया जीवन पर ।। स्थिर कोई पदार्थ ना जग में, मिले ना सुख किंचित भवमग में । ब्रह्मलोक से सुरगन आये, जिनवर का वैराग्य बढ़ाये ।। सुमति पुत्र को देकर राज, शिविका में प्रभु गए विराज । पुष्पक वन में गए हितकार, दीक्षा ली संग भूप हजार ।। गए शैलपुर दो दिन बाद, हुआ आहार वह निराबाध । पात्रदान से हर्षित हो कर, पंचाश्चार्य करे सुर आकर।। प्रभुवर गए लौट उपवन को, तत्पर हुए कर्म छेदन को । लगी समाधि नाग वृक्ष ताल, केवल ज्ञान उपाया निर्मल ।। इन्द्राज्ञा से समोशरण की, धनपति ने आकर रचना की । दिव्या देशना होती प्रभु की, ज्ञान पिपासा मिति जगत की ।। अनुप्रेक्षा द्वादश समझाई, धर्म स्वरुप विचारों भाई । शुक्ल ध्यान की महिमा गाई, शुक्ल ध्यान से हो शिवराई ।। चारो भेद सहित धारो मन, मोक्षमहल को पहुचो तत्क्षण । मोक्ष मार्ग दिखाया परभू ने, हर्षित हुए सकल जन मन में ।। इंद्र करे प्रार्थना जोड़ कर, सुखद विहार हुआ श्री जिनवर । गए अंत में शिखर सम्मेद, ध्यान में लीन हुए निरखेद ।। शुक्ल ध्यान से किया कर्म क्षय, संध्या समय पाया पद अक्षय । अश्विन अष्टमी शुक्ल महान, मोक्ष कल्याणक करे सुख आन ।। सुप्रभ कूट की करते पूजा, सुविधि नाथ है नाम दूजा । मगरमच्छ हैं लक्षण प्रभु का, मंगलमय था जीवन उनका ।। शिखर सम्मेद में भारी अतिशय, प्रभु प्रतिमा हैं चमत्कारमय । कलियुग में भी आते देव, प्रतिदिन नृत्य करें स्वयमेव ।। घुंघरू की झंकार गूंजती, सबके मन को मॊहित करती । ध्वनि सुनी हमने कानो से, पूजा की बहु उपमानो से ।। हमको हैं ये दृढ श्रद्धान, भक्ति से पाए शिवथान । भक्ति में शक्ति हैं न्यारी, राह दिखाए करुनाधारी ।। पुष्पदंत गुणगान से, निश्चित हो कल्याण । अरुणा अनुक्रम से मिले, अंतिम पद निर्वाण ।। ****************************** 2026-04-09 06:08:05
70614 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ? *सभी को जय जिनेन्द्* ? एवम् परम पूज्य गुरूदेव विभंजन सागर जी मुनिराज का मंगल आशीर्वाद * आपके परिवार में* *सुख , शांति, शक्ति, सम्पति, स्वरुप, संयम, सादगी, सफलता, समृध्दि, साधना, संस्कार और स्वास्थ्य की वृद्धि हो*. ....... आज का दिन मंगलमय हो ।। * शास्त्रों में लिखा है हमे रोज़ एक नियम/त्याग लेना ही चाहिये। * सभी धर्मो में त्याग /नियम को बहुत महत्व दिया गया है । * त्याग / नियम कितना भी छोटा क्यों न हो (सिर्फ 10 मिनिट का भी) बहुत अशुभ कर्म नष्ट होते हैं। * रोज़ कुछ त्याग करने से बुरे कर्मो की निर्ज़रा (क्षय होना) होती है * नरक आयु का बंध अगर हमारा हो चुका है तो हम किसी भी तरह के नियम जीवन में नहीं ले पाते है। 09 अप्रैल 2026 दिन: गुरुवार "" आप चाहे तो सिर्फ के लिये त्याग/नियम भी ले सकते हैं या और कोई भी नियम अपने अनुसार ले सकते है। नियम- आज *भिन्डी* खाने का त्याग है और *श्री पुष्पदंत चालीसा* पढ़ने का नियम है..... ?? शहर में विराजित साधू संतो के दर्शन की और निरंतराय आहार की भावना रखे और हो सके तो दर्शन करके आहार भी दें। अगर आप आज 09-04-2026 एक दिन का संकल्प करना चाहते है तो आप "नियम है।! *********************************** *श्री पुष्पदन्त चालीसा* दुःख से तृप्त मरुस्थल भाव में, सघन वृक्ष सम छायाकार । पुष्पदन्त पद छत्र छाव में, हम आश्रय पावें सुखकार ।। जम्बू द्वीप के भरत क्षेत्र में, काकंदी नामक नगरी में । राज्य करें सुग्रीव बलधारी, जयराम रानी थी प्यारी ।। नवमी फाल्गुन कृष्ण बखानी, षोडश स्वपन देखती रानी । सूत तीर्थंकर गर्भ में आये, गर्भ कल्याणक देव मनाये ।। प्रतिपदा मंगसिर उजियारी, जन्मे पुष्पदंत हितकारी । जन्मोत्सव की शोभा न्यारी, स्वर्गपुरी सम नगरी प्यारी ।। आयु थी दो लक्ष पूर्व की, ऊंचाई शत एक धनुष की । थामी जब राज्य बागडोर, क्षेत्र वृद्धि हुई चहुँ और ।। इच्छाए थी उनकी सिमित, मित्र प्रभु के हुए असीमित । एक दिन उल्कापात देख कर, दृष्टिपात किया जीवन पर ।। स्थिर कोई पदार्थ ना जग में, मिले ना सुख किंचित भवमग में । ब्रह्मलोक से सुरगन आये, जिनवर का वैराग्य बढ़ाये ।। सुमति पुत्र को देकर राज, शिविका में प्रभु गए विराज । पुष्पक वन में गए हितकार, दीक्षा ली संग भूप हजार ।। गए शैलपुर दो दिन बाद, हुआ आहार वह निराबाध । पात्रदान से हर्षित हो कर, पंचाश्चार्य करे सुर आकर।। प्रभुवर गए लौट उपवन को, तत्पर हुए कर्म छेदन को । लगी समाधि नाग वृक्ष ताल, केवल ज्ञान उपाया निर्मल ।। इन्द्राज्ञा से समोशरण की, धनपति ने आकर रचना की । दिव्या देशना होती प्रभु की, ज्ञान पिपासा मिति जगत की ।। अनुप्रेक्षा द्वादश समझाई, धर्म स्वरुप विचारों भाई । शुक्ल ध्यान की महिमा गाई, शुक्ल ध्यान से हो शिवराई ।। चारो भेद सहित धारो मन, मोक्षमहल को पहुचो तत्क्षण । मोक्ष मार्ग दिखाया परभू ने, हर्षित हुए सकल जन मन में ।। इंद्र करे प्रार्थना जोड़ कर, सुखद विहार हुआ श्री जिनवर । गए अंत में शिखर सम्मेद, ध्यान में लीन हुए निरखेद ।। शुक्ल ध्यान से किया कर्म क्षय, संध्या समय पाया पद अक्षय । अश्विन अष्टमी शुक्ल महान, मोक्ष कल्याणक करे सुख आन ।। सुप्रभ कूट की करते पूजा, सुविधि नाथ है नाम दूजा । मगरमच्छ हैं लक्षण प्रभु का, मंगलमय था जीवन उनका ।। शिखर सम्मेद में भारी अतिशय, प्रभु प्रतिमा हैं चमत्कारमय । कलियुग में भी आते देव, प्रतिदिन नृत्य करें स्वयमेव ।। घुंघरू की झंकार गूंजती, सबके मन को मॊहित करती । ध्वनि सुनी हमने कानो से, पूजा की बहु उपमानो से ।। हमको हैं ये दृढ श्रद्धान, भक्ति से पाए शिवथान । भक्ति में शक्ति हैं न्यारी, राह दिखाए करुनाधारी ।। पुष्पदंत गुणगान से, निश्चित हो कल्याण । अरुणा अनुक्रम से मिले, अंतिम पद निर्वाण ।। ****************************** 2026-04-09 06:08:05
70611 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? *मुनिश्री विनियोगसागर जी* *09.04.2026* *DAILY MOTIVATION* *Instagram link* :- <a href="https://www.instagram.com/viniyogworld?igsh=cmhkcHJzaTMwa29h" target="_blank">https://www.instagram.com/viniyogworld?igsh=cmhkcHJzaTMwa29h</a> *WhatsApp group link* :- <a href="https://chat.whatsapp.com/D6Eh34SN4kiHf9DNq2niWw?mode=hq1tcla" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/D6Eh34SN4kiHf9DNq2niWw?mode=hq1tcla</a> ? *नियम निभाए पुण्य बढ़ाएं*~ ?*णमोकार चालीसा* 2026-04-09 06:07:55
70612 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? *मुनिश्री विनियोगसागर जी* *09.04.2026* *DAILY MOTIVATION* *Instagram link* :- <a href="https://www.instagram.com/viniyogworld?igsh=cmhkcHJzaTMwa29h" target="_blank">https://www.instagram.com/viniyogworld?igsh=cmhkcHJzaTMwa29h</a> *WhatsApp group link* :- <a href="https://chat.whatsapp.com/D6Eh34SN4kiHf9DNq2niWw?mode=hq1tcla" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/D6Eh34SN4kiHf9DNq2niWw?mode=hq1tcla</a> ? *नियम निभाए पुण्य बढ़ाएं*~ ?*णमोकार चालीसा* 2026-04-09 06:07:55
70610 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ?? 2026-04-09 06:06:03
70609 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ?? 2026-04-09 06:06:02
70606 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ 2026-04-09 06:04:51
70607 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *कहानी बड़ी सुहानी* (1) *कहानी* *विश्वास* *एक व्यक्ति की नई नई शादी हुई और वो अपनी पत्नी के साथ वापिस आ रहे थे* ! *रास्ते में वो दोनों एक बडी झील को नाव के द्वारा पार कर रहे थे, तभी अचानक एक भयंकर तूफ़ान आ गया* !' *वो आदमी वीर था लेकिन औरत बहुत डरी हुई थी क्योंकि हालात बिल्कुल खराब थे*!* *नाव बहुत छोटी थी और तूफ़ान वास्तव में भयंकर था और दोनों किसी भी समय डूब सकते थे*! *लेकिन वो आदमी चुपचाप,निश्चल और शान्त बैठा था जैसे कि कुछ नहीं होने वाला* ! *औरत डर के मारे कांप रही थी और वो बोली "क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा" ये हमारे जीवन का आखिरी क्षण हो सकता है* ! *ऐसा नहीं लगता कि हम दूसरे किनारे पर कभी पहुंच भी पायेंगे ! अब तो कोई चमत्कार ही हमें बचा सकता है वर्ना हमारी मौत निश्चित है* ! *क्या तुम्हें बिल्कुल डर नहीं लग रहा ? कहीं तुम पागल या पत्थर तो नहीं हो* ? *वो आदमी खूब हँसा और एकाएक उसने म्यान से तलवार निकाल ली* ? *औरत अब और परेशान हो गई कि वो क्या कर रहा था* ? . *तब वो उस नंगी तलवार को उस औरत की गर्दन के पास ले आया, इतना पास कि उसकी गर्दन और तलवार के बीच बिल्कुल कम फर्क बचा था क्योंकि तलवार लगभग उसकी गर्दन को छू रही थी* ! *वो अपनी पत्नी से बोला "क्या तुम्हें डर लग रहा है"* *पत्नी खूब हँसी और बोली "जब तलवार तुम्हारे हाथ में है तो मुझे क्या डर"*? *मैं जानती हूं कि तुम मुझे बहुत प्यार करते हो !* *उसने तलवार वापिस म्यान में डाल दी और बोला कि "यही मेरा जवाब है"*. *मैं जानता हूं कि भगवान मुझे बहुत प्यार करते हैं और ये तूफ़ान उनके हाथ में है ! इसलिए जो भी होगा अच्छा ही होगा!* *अगर हम बच गये तो भी अच्छा और अगर नहीं बचे तो भी अच्छा, क्योंकि सब कुछ उस परमात्मा के हाथ में है और वो कभी कुछ भी गलत नहीं कर सकते !* *वो जो भी करेंगे हमारे भले के लिए करेंगे।* *हमेशा विश्वास बनाये रक्खो ! "व्यक्ति को हमेशा उस परमपिता परमात्मा पर विश्वास रखना चाहिये जो हमारे पूरे जीवन को बदल सकता है। **************************************** (2) *आज का सकारात्मक चिंतन* ?️अगर आप दुख पर ध्यान देंगे तो हमेशा दुखी रहेंगे और सुख पर ध्यान देंगे तो हमेशा सुखी रहेंगे क्योंकि यह जीवन का शाश्वत नियम है कि आप जिस पर ध्यान देंगे वही चीज सक्रिय हो जाती है। ?️यदि दो पेड़ों को एक साथ लगाया जाए मगर देख रेख एक ही पेड़ की की जाए, एक ही पेड़ का ध्यान रखा जाए और समय - समय पर खाद पानी भी उसी एक पेड़ को दिया जाए तो सीधी सी बात है कि जिस पेड़ पर ध्यान दिया जाएगा वही अच्छे से पुष्पित और फलित हो पायेगा। ठीक ऐसे ही सुख पर ध्यान केंद्रित करोगे तो जीवन में सुख की ही वृद्धि पाओगे और दुख पर ध्यान केंद्रित करोगे तो जीवन में दुख ही दुख प्राप्त होंगे। ?️विज्ञान ने भी इस बात को सिद्ध किया है कि जीवन में जिस वस्तु की हम उपेक्षा करने लगते हैं वो वस्तु धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खोना शुरू कर देती हैं। भले ही वो प्रेम हो, करुणा हो,जीवन का उल्लास हो अथवा सुख ही क्यों न हो। ?️जहाँ सकारात्मक दृष्टि जीवन में सुख की जननी होती है वहीं नकारात्मक दृष्टि जीवन को दुख और विषाद से भी भर देती है। इसलिए जीवन में सदा सकारात्मक दृष्टि ही रखी जानी चाहिए ताकि व्यक्ति के दुख और विषाद जैसे काल्पनिक शत्रुओं का समूल नाश हो सके। नाव डूबने के बाद नाविक और पांच-सात कुशल तैराक नदी में तैरकर अपनी-अपनी जान बचाये. उधर नाव, सबको नदी में छोड़.. खुद आगे निकल गई. बचे हुए लोग राजा के दरबार में पेश किये गये - राजा ने नाविक से पूछा- नाव कैसे डूबी! नाव में छेद था क्या? नाविक- नहीं महाराज! नाव बिल्कुल दुरुस्त थी. महाराज- इसका मतलब, तुमने सवारी अधिक बिठाई! नाविक- नहीं महाराज! सवारी नाव की क्षमतानुसार ही थे और न जाने कितनी बार मैंने उससे अधिक सवारी बिठाकर नाव पार लगाई है. राजा- आंधी, तूफान जैसी कोई प्राकृतिक आपदा भी तो नहीं थी! नाविक- मौसम सुहाना तथा नदी भी बिल्कुल शान्त थी महाराज. राजा- मदिरा पान तो नहीं न किया था तुमने. नाविक- नहीं महाराज! आप चाहें तो इन लोगों से पूछ कर संतुष्ट हो सकते हैं यह लोग भी मेरे साथ तैरकर जीवित लौटे हैं. महाराज- फिर, क्या चूक हुई? कैसे हुई इतनी बड़ी दुर्घटना? नाविक- महाराज! नाव हौले-हौले, बिना हिलकोरे लिये नदी में चल रही थी. तभी नाव में बैठे एक आदमी ने नाव के भीतर ही थूक दिया. मैंने पतवार रोक के उसका विरोध किया और पूछा कि "तुमने नाव के भीतर क्यों थूका?" उसने उपहास में कहा कि "क्या मेरे नाव थूकने से नाव डूब जायेगी." राजा- फिर? नाविक- महाराज मेरी इतनी बात पर वो तुनक गया बोला पैसा देते हैं नदी पार करने के. कोई एहसान नहीं कर रहे तुम और तुम्हारी नाव. राजा (विस्मय के साथ)- पैसा देने का क्या मतलब! नाव में थूकेगा? अच्छा! फिर क्या हुआ? नाविक- महाराज वो मुझसे बहस करने लगा. राजा-नाव में बैठे और लोग क्या कर रहे थे? क्या उन लोगों ने उसका विरोध नहीं किया? नाविक- महाराज ऐसा नहीं था.. नाव के बहुत से लोग मेरे साथ उसका विरोध करने लगे. राजा- तब तो उसका मनोबल टूटा होगा. उसको अपनी गलती का एहसास हुआ होगा. नाविक- ऐसा नहीं था महाराज! नाव में कुछ लोग ऐसे भी थे जो उसके साथ खड़े हो गये तथा नाव के भीतर ही दो खेमे बंट गये. बीच मझधार में ही यात्री आपस में उलझ पड़े. राजा- चलती नाव में ही मारपीट! तुमने उन्हें समझाया तथा रोका नहीं.. नाविक- रोका महाराज, हाथ जोड़कर विनती भी की. मैने कहा " नाव इस वक्त अपने नाजुक दौर में है. इस वक्त नाव में तनिक भी हलचल हम-सबकी जान का खतरा बन जायेगी" लेकिन कौन मेरी सुने! सब एक दूसरे पर टूट पड़े. तथा नाव ने बीच धारा में ही संतुलन खो दिया महाराज. *कहानी का सार*:- इस नाजुक दौर में संतुलन बनाये रखे ताकि नाव के संतुलन खोने से बाकी साथियों को नुकसान न हो। मैंने कहा- "नाव तो नहीं डूबेगी लेकिन तुम्हारे इस निकृष्ट कार्य से हम शर्म से डूब रहें हैं.. बताओ!जो नाव तुमको अपने सीने पर बिठाकर इस पार से उस पार ले जा रही है तुम उसी में थूक रहे हो. **************************************** (3) *कहानी* *।। माँ और बेटी ।।* *एक सौदागर राजा के महल में दो गायों को लेकर आया - दोनों ही स्वस्थ, सुंदर व दिखने में लगभग एक जैसी थीं।* *सौदागर ने राजा से कहा "महाराज - ये गायें माँ-बेटी हैं परन्तु मुझे यह नहीं पता कि माँ कौन है व बेटी कौन - क्योंकि दोनों में खास अंतर नहीं है।* मैंने अनेक जगह पर लोगों से यह पूछा किंतु कोई भी इन दोनों में माँ - बेटी की पहचान नहीं कर पाया बाद में मुझे किसी ने यह कहा कि आपका बुजुर्ग मंत्री बेहद कुशाग्र बुद्धि का है और यहाँ पर मुझे अवश्य मेरे प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा... इसलिए मैं यहाँ पर चला आया - कृपया मेरी समस्या का समाधान किया जाए।" यह सुनकर सभी दरबारी मंत्री की ओर देखने लगे मंत्री अपने स्थान से उठकर गायों की तरफ गया। उसने दोनों का बारीकी से निरीक्षण किया किंतु वह भी नहीं पहचान पाया कि वास्तव में कौन मां है और कौन बेटी ? अब मंत्री बड़ी दुविधा में फंस गया, उसने सौदागर से एक दिन की मोहलत मांगी। घर आने पर वह बेहद परेशान रहा - उसकी पत्नी इस बात को समझ गई। उसने जब मंत्री से परेशानी का कारण पूछा तो उसने सौदागर की बात बता दी। यह सुनकर पत्नी बोली 'अरे ! बस इतनी सी बात है - यह तो मैं भी बता सकती हूँ ।' अगले दिन मंत्री अपनी पत्नी को वहाँ ले गया जहाँ गायें बंधी थीं। मंत्री की पत्नी ने दोनों गायों के आगे अच्छा भोजन रखा - कुछ ही देर बाद उसने माँ व बेटी में अंतर बता दिया - लोग चकित रह गए। मंत्री की पत्नी बोली "पहली गाय जल्दी - जल्दी खाने के बाद दूसरी गाय के भोजन में मुंह मारने लगी और दूसरी वाली ने पहली वाली के लिए अपना भोजन छोड़ दिया, ऐसा केवल एक मां ही कर सकती है - यानि दूसरी वाली माँ है। माँ ही बच्चे के लिए भूखी रह सकती है - माँ में ही त्याग, करुणा, वात्सल्य, ममत्व के गुण विद्यमान होते है.... दोस्तों इस दुनियाँ मे माँ से महान कोई नही है माँ के चरणों मे भगवान कॊ भी झुकना पड़ता है.. *माँ ममता का सागर नहीं..पर महासागर है...* *सदैव प्रसन्न रहें...* *कभी अपने लिए तो कभी अपनों के लिए...* **************************************** (4) *कहानी* *दूसरों को सही-गलत साबित करने में जल्दबाजी न करें* *पहली कहानी :* ट्रेन में एक पिता-पुत्र सफर कर रहे थे. 24 वर्षीय पुत्र खिड़की से बाहर देख रहा था, अचानक वो चिल्लाया – पापा देखो पेड़ पीछे की ओर भाग रहे हैं ! पिता कुछ बोला नहीं, बस सुनकर मुस्कुरा दिया. ये देखकर बगल में बैठे एक युवा दम्पति को अजीब लगा और उस लड़के के बचकाने व्यवहार पर दया भी आई. तब तक वो लड़का फिर से बोला – पापा देखो बादल हमारे साथ दौड़ रहे हैं ! युवा दम्पति से रहा नहीं गया और वो उसके पिता से बोल पड़े – आप अपने लड़के को किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते ? लड़के का पिता मुस्कुराया और बोला – हमने दिखाया था और हम अभी सीधे हॉस्पिटल से ही आ रहे हैं. मेरा लड़का जन्म से अंधा था और आज वो यह दुनिया पहली बार देख रहा है. ———- *दूसरी कहानी :* एक प्रोफेसर अपनी क्लास में कहानी सुना रहे थे, जोकि इस प्रकार है – एक बार समुद्र के बीच में एक बड़े जहाज पर बड़ी दुर्घटना हो गयी. कप्तान ने शिप खाली करने का आदेश दिया. जहाज पर एक युवा दम्पति थे. जब लाइफबोट पर चढ़ने का उनका नम्बर आया तो देखा गया नाव पर केवल एक व्यक्ति के लिए ही जगह है. इस मौके पर आदमी ने पत्नी को छोड़ दिया और खुद नाव पर कूद गया. डूबते हुए जहाज पर खड़ी औरत ने जाते हुए अपने पति से चिल्लाकर एक वाक्य कहा. अब प्रोफेसर ने रुककर स्टूडेंट्स से पूछा – तुम लोगों को क्या लगता है, उस स्त्री ने अपने पति से क्या कहा होगा ? ज्यादातर विद्यार्थी फ़ौरन चिल्लाये – स्त्री ने कहा – मैं तुमसे नफरत करती हूँ ! I hate you ! प्रोफेसर ने देखा एक स्टूडेंट एकदम शांत बैठा हुआ था, प्रोफेसर ने उससे पूछा कि तुम बताओ तुम्हे क्या लगता है ? वो लड़का बोला – मुझे लगता है, औरत ने कहा होगा – हमारे बच्चे का ख्याल रखना ! प्रोफेसर को आश्चर्य हुआ, उन्होंने लडके से पूछा – क्या तुमने यह कहानी पहले सुन रखी थी ? लड़का बोला- जी नहीं, लेकिन यही बात बीमारी से मरती हुई मेरी माँ ने मेरे पिता से कही थी. प्रोफेसर ने दुखपूर्वक कहा – तुम्हारा उत्तर सही है ! प्रोफेसर ने कहानी आगे बढ़ाई – जहाज डूब गया, स्त्री मर गयी, पति किनारे पहुंचा और उसने अपना बाकि जीवन अपनी एकमात्र पुत्री के समुचित लालन-पालन में लगा दिया. कई सालों बाद जब वो व्यक्ति मर गया तो एक दिन सफाई करते हुए उसकी लड़की को अपने पिता की एक डायरी मिली. डायरी से उसे पता चला कि जिस समय उसके माता-पिता उस जहाज पर सफर कर रहे थे तो उसकी माँ एक जानलेवा बीमारी से ग्रस्त थी और उनके जीवन के कुछ दिन ही शेष थे. ऐसे कठिन मौके पर उसके पिता ने एक कड़ा निर्णय लिया और लाइफबोट पर कूद गया. उसके पिता ने डायरी में लिखा था – तुम्हारे बिना मेरे जीवन को कोई मतलब नहीं, मैं तो तुम्हारे साथ ही समंदर में समा जाना चाहता था. लेकिन अपनी संतान का ख्याल आने पर मुझे तुमको अकेले छोड़कर जाना पड़ा. जब प्रोफेसर ने कहानी समाप्त की तो, पूरी क्लास में शांति थी. ————— *?इस संसार में कईयों सही गलत बातें हैं लेकिन उसके अतिरिक्त भी कई जटिलतायें हैं, जिन्हें समझना आसान नहीं. इसीलिए ऊपरी सतह से देखकर बिना गहराई को जाने-समझे हर परिस्थिति का एकदम सही आकलन नहीं किया जा सकता.* ?*कलह होने पर जो पहले माफ़ी मांगे, जरुरी नहीं उसी की गलती हो. हो सकता है वो रिश्ते को बनाये रखना ज्यादा महत्वपूर्ण समझता हो.* ?*दोस्तों के साथ खाते-पीते, पार्टी करते समय जो दोस्त बिल पे करता है, जरुरी नहीं उसकी जेब नोटों से ठसाठस भरी हो. हो सकता है उसके लिए दोस्ती के सामने पैसों की अहमियत कम हो.* ?*जो लोग आपकी मदद करते हैं, जरुरी नहीं वो आपके एहसानों के बोझ तले दबे हों. वो आपकी मदद करते हैं क्योंकि उनके दिलों में दयालुता और करुणा का निवास है.* ?*आजकल जीवन कठिन इसीलिए हो गया है क्योंकि हमने लोगो को समझना कम कर दिया और फौरी तौर पर judge करना शुरू कर दिया है. थोड़ी सी समझ और थोड़ी सी मानवता ही आपको सही रास्ता दिखा सकती है. जीवन में निर्णय लेने के कई ऐसे पल आयेंगे, सो अगली बार किसी पर भी अपने पूर्वाग्रह का ठप्पा लगाने से पहले विचार अवश्य करें.* ********************************** 2026-04-09 06:04:51
70608 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ 2026-04-09 06:04:51
70605 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *कहानी बड़ी सुहानी* (1) *कहानी* *विश्वास* *एक व्यक्ति की नई नई शादी हुई और वो अपनी पत्नी के साथ वापिस आ रहे थे* ! *रास्ते में वो दोनों एक बडी झील को नाव के द्वारा पार कर रहे थे, तभी अचानक एक भयंकर तूफ़ान आ गया* !' *वो आदमी वीर था लेकिन औरत बहुत डरी हुई थी क्योंकि हालात बिल्कुल खराब थे*!* *नाव बहुत छोटी थी और तूफ़ान वास्तव में भयंकर था और दोनों किसी भी समय डूब सकते थे*! *लेकिन वो आदमी चुपचाप,निश्चल और शान्त बैठा था जैसे कि कुछ नहीं होने वाला* ! *औरत डर के मारे कांप रही थी और वो बोली "क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा" ये हमारे जीवन का आखिरी क्षण हो सकता है* ! *ऐसा नहीं लगता कि हम दूसरे किनारे पर कभी पहुंच भी पायेंगे ! अब तो कोई चमत्कार ही हमें बचा सकता है वर्ना हमारी मौत निश्चित है* ! *क्या तुम्हें बिल्कुल डर नहीं लग रहा ? कहीं तुम पागल या पत्थर तो नहीं हो* ? *वो आदमी खूब हँसा और एकाएक उसने म्यान से तलवार निकाल ली* ? *औरत अब और परेशान हो गई कि वो क्या कर रहा था* ? . *तब वो उस नंगी तलवार को उस औरत की गर्दन के पास ले आया, इतना पास कि उसकी गर्दन और तलवार के बीच बिल्कुल कम फर्क बचा था क्योंकि तलवार लगभग उसकी गर्दन को छू रही थी* ! *वो अपनी पत्नी से बोला "क्या तुम्हें डर लग रहा है"* *पत्नी खूब हँसी और बोली "जब तलवार तुम्हारे हाथ में है तो मुझे क्या डर"*? *मैं जानती हूं कि तुम मुझे बहुत प्यार करते हो !* *उसने तलवार वापिस म्यान में डाल दी और बोला कि "यही मेरा जवाब है"*. *मैं जानता हूं कि भगवान मुझे बहुत प्यार करते हैं और ये तूफ़ान उनके हाथ में है ! इसलिए जो भी होगा अच्छा ही होगा!* *अगर हम बच गये तो भी अच्छा और अगर नहीं बचे तो भी अच्छा, क्योंकि सब कुछ उस परमात्मा के हाथ में है और वो कभी कुछ भी गलत नहीं कर सकते !* *वो जो भी करेंगे हमारे भले के लिए करेंगे।* *हमेशा विश्वास बनाये रक्खो ! "व्यक्ति को हमेशा उस परमपिता परमात्मा पर विश्वास रखना चाहिये जो हमारे पूरे जीवन को बदल सकता है। **************************************** (2) *आज का सकारात्मक चिंतन* ?️अगर आप दुख पर ध्यान देंगे तो हमेशा दुखी रहेंगे और सुख पर ध्यान देंगे तो हमेशा सुखी रहेंगे क्योंकि यह जीवन का शाश्वत नियम है कि आप जिस पर ध्यान देंगे वही चीज सक्रिय हो जाती है। ?️यदि दो पेड़ों को एक साथ लगाया जाए मगर देख रेख एक ही पेड़ की की जाए, एक ही पेड़ का ध्यान रखा जाए और समय - समय पर खाद पानी भी उसी एक पेड़ को दिया जाए तो सीधी सी बात है कि जिस पेड़ पर ध्यान दिया जाएगा वही अच्छे से पुष्पित और फलित हो पायेगा। ठीक ऐसे ही सुख पर ध्यान केंद्रित करोगे तो जीवन में सुख की ही वृद्धि पाओगे और दुख पर ध्यान केंद्रित करोगे तो जीवन में दुख ही दुख प्राप्त होंगे। ?️विज्ञान ने भी इस बात को सिद्ध किया है कि जीवन में जिस वस्तु की हम उपेक्षा करने लगते हैं वो वस्तु धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खोना शुरू कर देती हैं। भले ही वो प्रेम हो, करुणा हो,जीवन का उल्लास हो अथवा सुख ही क्यों न हो। ?️जहाँ सकारात्मक दृष्टि जीवन में सुख की जननी होती है वहीं नकारात्मक दृष्टि जीवन को दुख और विषाद से भी भर देती है। इसलिए जीवन में सदा सकारात्मक दृष्टि ही रखी जानी चाहिए ताकि व्यक्ति के दुख और विषाद जैसे काल्पनिक शत्रुओं का समूल नाश हो सके। नाव डूबने के बाद नाविक और पांच-सात कुशल तैराक नदी में तैरकर अपनी-अपनी जान बचाये. उधर नाव, सबको नदी में छोड़.. खुद आगे निकल गई. बचे हुए लोग राजा के दरबार में पेश किये गये - राजा ने नाविक से पूछा- नाव कैसे डूबी! नाव में छेद था क्या? नाविक- नहीं महाराज! नाव बिल्कुल दुरुस्त थी. महाराज- इसका मतलब, तुमने सवारी अधिक बिठाई! नाविक- नहीं महाराज! सवारी नाव की क्षमतानुसार ही थे और न जाने कितनी बार मैंने उससे अधिक सवारी बिठाकर नाव पार लगाई है. राजा- आंधी, तूफान जैसी कोई प्राकृतिक आपदा भी तो नहीं थी! नाविक- मौसम सुहाना तथा नदी भी बिल्कुल शान्त थी महाराज. राजा- मदिरा पान तो नहीं न किया था तुमने. नाविक- नहीं महाराज! आप चाहें तो इन लोगों से पूछ कर संतुष्ट हो सकते हैं यह लोग भी मेरे साथ तैरकर जीवित लौटे हैं. महाराज- फिर, क्या चूक हुई? कैसे हुई इतनी बड़ी दुर्घटना? नाविक- महाराज! नाव हौले-हौले, बिना हिलकोरे लिये नदी में चल रही थी. तभी नाव में बैठे एक आदमी ने नाव के भीतर ही थूक दिया. मैंने पतवार रोक के उसका विरोध किया और पूछा कि "तुमने नाव के भीतर क्यों थूका?" उसने उपहास में कहा कि "क्या मेरे नाव थूकने से नाव डूब जायेगी." राजा- फिर? नाविक- महाराज मेरी इतनी बात पर वो तुनक गया बोला पैसा देते हैं नदी पार करने के. कोई एहसान नहीं कर रहे तुम और तुम्हारी नाव. राजा (विस्मय के साथ)- पैसा देने का क्या मतलब! नाव में थूकेगा? अच्छा! फिर क्या हुआ? नाविक- महाराज वो मुझसे बहस करने लगा. राजा-नाव में बैठे और लोग क्या कर रहे थे? क्या उन लोगों ने उसका विरोध नहीं किया? नाविक- महाराज ऐसा नहीं था.. नाव के बहुत से लोग मेरे साथ उसका विरोध करने लगे. राजा- तब तो उसका मनोबल टूटा होगा. उसको अपनी गलती का एहसास हुआ होगा. नाविक- ऐसा नहीं था महाराज! नाव में कुछ लोग ऐसे भी थे जो उसके साथ खड़े हो गये तथा नाव के भीतर ही दो खेमे बंट गये. बीच मझधार में ही यात्री आपस में उलझ पड़े. राजा- चलती नाव में ही मारपीट! तुमने उन्हें समझाया तथा रोका नहीं.. नाविक- रोका महाराज, हाथ जोड़कर विनती भी की. मैने कहा " नाव इस वक्त अपने नाजुक दौर में है. इस वक्त नाव में तनिक भी हलचल हम-सबकी जान का खतरा बन जायेगी" लेकिन कौन मेरी सुने! सब एक दूसरे पर टूट पड़े. तथा नाव ने बीच धारा में ही संतुलन खो दिया महाराज. *कहानी का सार*:- इस नाजुक दौर में संतुलन बनाये रखे ताकि नाव के संतुलन खोने से बाकी साथियों को नुकसान न हो। मैंने कहा- "नाव तो नहीं डूबेगी लेकिन तुम्हारे इस निकृष्ट कार्य से हम शर्म से डूब रहें हैं.. बताओ!जो नाव तुमको अपने सीने पर बिठाकर इस पार से उस पार ले जा रही है तुम उसी में थूक रहे हो. **************************************** (3) *कहानी* *।। माँ और बेटी ।।* *एक सौदागर राजा के महल में दो गायों को लेकर आया - दोनों ही स्वस्थ, सुंदर व दिखने में लगभग एक जैसी थीं।* *सौदागर ने राजा से कहा "महाराज - ये गायें माँ-बेटी हैं परन्तु मुझे यह नहीं पता कि माँ कौन है व बेटी कौन - क्योंकि दोनों में खास अंतर नहीं है।* मैंने अनेक जगह पर लोगों से यह पूछा किंतु कोई भी इन दोनों में माँ - बेटी की पहचान नहीं कर पाया बाद में मुझे किसी ने यह कहा कि आपका बुजुर्ग मंत्री बेहद कुशाग्र बुद्धि का है और यहाँ पर मुझे अवश्य मेरे प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा... इसलिए मैं यहाँ पर चला आया - कृपया मेरी समस्या का समाधान किया जाए।" यह सुनकर सभी दरबारी मंत्री की ओर देखने लगे मंत्री अपने स्थान से उठकर गायों की तरफ गया। उसने दोनों का बारीकी से निरीक्षण किया किंतु वह भी नहीं पहचान पाया कि वास्तव में कौन मां है और कौन बेटी ? अब मंत्री बड़ी दुविधा में फंस गया, उसने सौदागर से एक दिन की मोहलत मांगी। घर आने पर वह बेहद परेशान रहा - उसकी पत्नी इस बात को समझ गई। उसने जब मंत्री से परेशानी का कारण पूछा तो उसने सौदागर की बात बता दी। यह सुनकर पत्नी बोली 'अरे ! बस इतनी सी बात है - यह तो मैं भी बता सकती हूँ ।' अगले दिन मंत्री अपनी पत्नी को वहाँ ले गया जहाँ गायें बंधी थीं। मंत्री की पत्नी ने दोनों गायों के आगे अच्छा भोजन रखा - कुछ ही देर बाद उसने माँ व बेटी में अंतर बता दिया - लोग चकित रह गए। मंत्री की पत्नी बोली "पहली गाय जल्दी - जल्दी खाने के बाद दूसरी गाय के भोजन में मुंह मारने लगी और दूसरी वाली ने पहली वाली के लिए अपना भोजन छोड़ दिया, ऐसा केवल एक मां ही कर सकती है - यानि दूसरी वाली माँ है। माँ ही बच्चे के लिए भूखी रह सकती है - माँ में ही त्याग, करुणा, वात्सल्य, ममत्व के गुण विद्यमान होते है.... दोस्तों इस दुनियाँ मे माँ से महान कोई नही है माँ के चरणों मे भगवान कॊ भी झुकना पड़ता है.. *माँ ममता का सागर नहीं..पर महासागर है...* *सदैव प्रसन्न रहें...* *कभी अपने लिए तो कभी अपनों के लिए...* **************************************** (4) *कहानी* *दूसरों को सही-गलत साबित करने में जल्दबाजी न करें* *पहली कहानी :* ट्रेन में एक पिता-पुत्र सफर कर रहे थे. 24 वर्षीय पुत्र खिड़की से बाहर देख रहा था, अचानक वो चिल्लाया – पापा देखो पेड़ पीछे की ओर भाग रहे हैं ! पिता कुछ बोला नहीं, बस सुनकर मुस्कुरा दिया. ये देखकर बगल में बैठे एक युवा दम्पति को अजीब लगा और उस लड़के के बचकाने व्यवहार पर दया भी आई. तब तक वो लड़का फिर से बोला – पापा देखो बादल हमारे साथ दौड़ रहे हैं ! युवा दम्पति से रहा नहीं गया और वो उसके पिता से बोल पड़े – आप अपने लड़के को किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते ? लड़के का पिता मुस्कुराया और बोला – हमने दिखाया था और हम अभी सीधे हॉस्पिटल से ही आ रहे हैं. मेरा लड़का जन्म से अंधा था और आज वो यह दुनिया पहली बार देख रहा है. ———- *दूसरी कहानी :* एक प्रोफेसर अपनी क्लास में कहानी सुना रहे थे, जोकि इस प्रकार है – एक बार समुद्र के बीच में एक बड़े जहाज पर बड़ी दुर्घटना हो गयी. कप्तान ने शिप खाली करने का आदेश दिया. जहाज पर एक युवा दम्पति थे. जब लाइफबोट पर चढ़ने का उनका नम्बर आया तो देखा गया नाव पर केवल एक व्यक्ति के लिए ही जगह है. इस मौके पर आदमी ने पत्नी को छोड़ दिया और खुद नाव पर कूद गया. डूबते हुए जहाज पर खड़ी औरत ने जाते हुए अपने पति से चिल्लाकर एक वाक्य कहा. अब प्रोफेसर ने रुककर स्टूडेंट्स से पूछा – तुम लोगों को क्या लगता है, उस स्त्री ने अपने पति से क्या कहा होगा ? ज्यादातर विद्यार्थी फ़ौरन चिल्लाये – स्त्री ने कहा – मैं तुमसे नफरत करती हूँ ! I hate you ! प्रोफेसर ने देखा एक स्टूडेंट एकदम शांत बैठा हुआ था, प्रोफेसर ने उससे पूछा कि तुम बताओ तुम्हे क्या लगता है ? वो लड़का बोला – मुझे लगता है, औरत ने कहा होगा – हमारे बच्चे का ख्याल रखना ! प्रोफेसर को आश्चर्य हुआ, उन्होंने लडके से पूछा – क्या तुमने यह कहानी पहले सुन रखी थी ? लड़का बोला- जी नहीं, लेकिन यही बात बीमारी से मरती हुई मेरी माँ ने मेरे पिता से कही थी. प्रोफेसर ने दुखपूर्वक कहा – तुम्हारा उत्तर सही है ! प्रोफेसर ने कहानी आगे बढ़ाई – जहाज डूब गया, स्त्री मर गयी, पति किनारे पहुंचा और उसने अपना बाकि जीवन अपनी एकमात्र पुत्री के समुचित लालन-पालन में लगा दिया. कई सालों बाद जब वो व्यक्ति मर गया तो एक दिन सफाई करते हुए उसकी लड़की को अपने पिता की एक डायरी मिली. डायरी से उसे पता चला कि जिस समय उसके माता-पिता उस जहाज पर सफर कर रहे थे तो उसकी माँ एक जानलेवा बीमारी से ग्रस्त थी और उनके जीवन के कुछ दिन ही शेष थे. ऐसे कठिन मौके पर उसके पिता ने एक कड़ा निर्णय लिया और लाइफबोट पर कूद गया. उसके पिता ने डायरी में लिखा था – तुम्हारे बिना मेरे जीवन को कोई मतलब नहीं, मैं तो तुम्हारे साथ ही समंदर में समा जाना चाहता था. लेकिन अपनी संतान का ख्याल आने पर मुझे तुमको अकेले छोड़कर जाना पड़ा. जब प्रोफेसर ने कहानी समाप्त की तो, पूरी क्लास में शांति थी. ————— *?इस संसार में कईयों सही गलत बातें हैं लेकिन उसके अतिरिक्त भी कई जटिलतायें हैं, जिन्हें समझना आसान नहीं. इसीलिए ऊपरी सतह से देखकर बिना गहराई को जाने-समझे हर परिस्थिति का एकदम सही आकलन नहीं किया जा सकता.* ?*कलह होने पर जो पहले माफ़ी मांगे, जरुरी नहीं उसी की गलती हो. हो सकता है वो रिश्ते को बनाये रखना ज्यादा महत्वपूर्ण समझता हो.* ?*दोस्तों के साथ खाते-पीते, पार्टी करते समय जो दोस्त बिल पे करता है, जरुरी नहीं उसकी जेब नोटों से ठसाठस भरी हो. हो सकता है उसके लिए दोस्ती के सामने पैसों की अहमियत कम हो.* ?*जो लोग आपकी मदद करते हैं, जरुरी नहीं वो आपके एहसानों के बोझ तले दबे हों. वो आपकी मदद करते हैं क्योंकि उनके दिलों में दयालुता और करुणा का निवास है.* ?*आजकल जीवन कठिन इसीलिए हो गया है क्योंकि हमने लोगो को समझना कम कर दिया और फौरी तौर पर judge करना शुरू कर दिया है. थोड़ी सी समझ और थोड़ी सी मानवता ही आपको सही रास्ता दिखा सकती है. जीवन में निर्णय लेने के कई ऐसे पल आयेंगे, सो अगली बार किसी पर भी अपने पूर्वाग्रह का ठप्पा लगाने से पहले विचार अवश्य करें.* ********************************** 2026-04-09 06:04:50