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75889 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-04-11 04:41:13
75890 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-04-11 04:41:13
75887 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-11 04:41:11
75888 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-11 04:41:11
75886 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-11 04:40:56
75885 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-11 04:40:55
75883 40449670 SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE सहर्ष सूचित किया जाता है कि *जैन पाठशाला* के अंतर्गत *विल्सन गार्डन* मंदिर में *Mon - fri सुबह 10-11* बजे *4 वर्ष और अधिक उम्र* के बच्चों की क्लास *14th april* से शुरू होने जा रही है। जून मे छुट्टियाँ समाप्त होने पर समय परिवर्तन किया जाएगा । जल्द से जल्द संलग्न फ़ार्म भरें :- <a href="https://forms.gle/64Uj1zAUsvciuGGK8" target="_blank">https://forms.gle/64Uj1zAUsvciuGGK8</a> अधिक जानकारी हेतु संपर्क करे:- *राजुल बज*- 98809 82928 *नवीना बड़जात्या* -7022997003 2026-04-11 04:38:44
75884 40449670 SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE सहर्ष सूचित किया जाता है कि *जैन पाठशाला* के अंतर्गत *विल्सन गार्डन* मंदिर में *Mon - fri सुबह 10-11* बजे *4 वर्ष और अधिक उम्र* के बच्चों की क्लास *14th april* से शुरू होने जा रही है। जून मे छुट्टियाँ समाप्त होने पर समय परिवर्तन किया जाएगा । जल्द से जल्द संलग्न फ़ार्म भरें :- <a href="https://forms.gle/64Uj1zAUsvciuGGK8" target="_blank">https://forms.gle/64Uj1zAUsvciuGGK8</a> अधिक जानकारी हेतु संपर्क करे:- *राजुल बज*- 98809 82928 *नवीना बड़जात्या* -7022997003 2026-04-11 04:38:44
75881 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ *?? कहानी ??* *सर्वस्व दान ही बड़ा दान है* *अढ़ाई हजार वर्ष पुरानी घटना है। एक बार बुद्ध वैशाली में पहुँचे तो लोग हीरों और मोतियों के थाल भर-भर कर भेंट करने लगे और समझने लगे कि हमने महान त्याग किया है। उस समय की परम्परा थी कि भेंट पर हाथ रख दिया जाता था और उसका यह अभिप्राय होता था कि लाई हुई भेंट स्वीकार करली गई है।* *बुद्ध के पास में हीरों मोतियों के रूप में लाखों की सम्पत्ति आई तथा उन्होंने उस पर हाथ रख दिया। कुछ समय पश्चात् एक वृद्धा भी आई। वह मालिन थी। बहुत ही दीन हीन थी। उसके पास मात्र आधा अनार था। वृद्धा वही अनार लेकर आई और उसने जैसे ही भेंट के रूप में वह रक्खा कि बुद्ध ने उस आधे अनार के ऊपर दोनों हाथ रख दिये।* *महान् सम्पतिशाली वहाँ उपस्थित थे और वे लाखों व जवाहरात भेट कर चुके थे। अपनी भेंट की महानता का अनुभव करके वे अकडे हुए बैठे थे। उन्होंने बुद्ध का यह कार्य देखा तो चकित रह गये। उन्होंने सोचा, यह क्या हो गया? हमने इतना बड़ा दान दिया तो उस पर केवल एक हाथ रक्खा और इस वृद्धा के आधे अनार पर दोनों हाथ रख दिये। इसका क्या कारण है?* *किसी ने बुद्ध जी से पूछ लिया- महात्मन् ! इस वृद्धा के इस तुच्छ दान को इतना महत्व क्यों मिला है?* *बुद्ध ने कहा- भाइयों ! तुम समझे नहीं? तुम्हारे पास तो भेंट करने के बाद भी लाखों का धन बच गया होगा, परन्तु इस वृद्धा से पूछो, इसके पास क्या बचा है? इसने तो आधे अनार के रूप में अपना सर्वस्त्र ही मुझे अर्पण कर दिया है। लाखों, करोड़ों के दान का मूल्य हो सकता है लेकिन सर्वस्त्र दान का नहीं। सर्वस्व दान की तुलना साम्राज्य दान से भी नहीं की जा सकती। वह भीतर के निर्मल परिणामों से होता है अतः वही सर्वश्रेष्ठ है।* *_?? संकलन कर्ता ??_* &gt; _*✍?....दान कितना कर रहे हो यह महत्वपूर्ण नहीं बल्कि कैसी भावनाओं से कर रहे हो फल उसका प्राप्त होता है नाम के लिए कर रहे हो तो तत्काल उसका फल प्रसिद्धि मिल जाएगी यदि सामने वाले का धर्म आराधना में सहायक बनने की भावना से कर रहे हो तो वैसे ही अनुकूल निमित्त तुम्हें भी मिल जाएंगे परंतु यदि अपनी मान आदि कषायों को घटाने के लिए कर रहे हो तो वही सार्थक दान है और वही भविष्य में मोक्षमार्ग में भी सहायक होगा हमारे सच्चे देव शास्त्र गुरु हमें ऐसी ही प्रेरणा देते हैं हम सब भी सभी का मोक्षमार्ग निर्विघ्न वृद्धिगत हो ऐसी भावना से ही सभी को सहयोग करते चलें और पूर्ण सुखी होने के लक्ष्य से में आगे बढ़ें और परंपरा से निर्वाण को प्राप्त कर सच्चे सुखी हों।*_ 2026-04-11 04:32:20
75882 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ *?? कहानी ??* *सर्वस्व दान ही बड़ा दान है* *अढ़ाई हजार वर्ष पुरानी घटना है। एक बार बुद्ध वैशाली में पहुँचे तो लोग हीरों और मोतियों के थाल भर-भर कर भेंट करने लगे और समझने लगे कि हमने महान त्याग किया है। उस समय की परम्परा थी कि भेंट पर हाथ रख दिया जाता था और उसका यह अभिप्राय होता था कि लाई हुई भेंट स्वीकार करली गई है।* *बुद्ध के पास में हीरों मोतियों के रूप में लाखों की सम्पत्ति आई तथा उन्होंने उस पर हाथ रख दिया। कुछ समय पश्चात् एक वृद्धा भी आई। वह मालिन थी। बहुत ही दीन हीन थी। उसके पास मात्र आधा अनार था। वृद्धा वही अनार लेकर आई और उसने जैसे ही भेंट के रूप में वह रक्खा कि बुद्ध ने उस आधे अनार के ऊपर दोनों हाथ रख दिये।* *महान् सम्पतिशाली वहाँ उपस्थित थे और वे लाखों व जवाहरात भेट कर चुके थे। अपनी भेंट की महानता का अनुभव करके वे अकडे हुए बैठे थे। उन्होंने बुद्ध का यह कार्य देखा तो चकित रह गये। उन्होंने सोचा, यह क्या हो गया? हमने इतना बड़ा दान दिया तो उस पर केवल एक हाथ रक्खा और इस वृद्धा के आधे अनार पर दोनों हाथ रख दिये। इसका क्या कारण है?* *किसी ने बुद्ध जी से पूछ लिया- महात्मन् ! इस वृद्धा के इस तुच्छ दान को इतना महत्व क्यों मिला है?* *बुद्ध ने कहा- भाइयों ! तुम समझे नहीं? तुम्हारे पास तो भेंट करने के बाद भी लाखों का धन बच गया होगा, परन्तु इस वृद्धा से पूछो, इसके पास क्या बचा है? इसने तो आधे अनार के रूप में अपना सर्वस्त्र ही मुझे अर्पण कर दिया है। लाखों, करोड़ों के दान का मूल्य हो सकता है लेकिन सर्वस्त्र दान का नहीं। सर्वस्व दान की तुलना साम्राज्य दान से भी नहीं की जा सकती। वह भीतर के निर्मल परिणामों से होता है अतः वही सर्वश्रेष्ठ है।* *_?? संकलन कर्ता ??_* &gt; _*✍?....दान कितना कर रहे हो यह महत्वपूर्ण नहीं बल्कि कैसी भावनाओं से कर रहे हो फल उसका प्राप्त होता है नाम के लिए कर रहे हो तो तत्काल उसका फल प्रसिद्धि मिल जाएगी यदि सामने वाले का धर्म आराधना में सहायक बनने की भावना से कर रहे हो तो वैसे ही अनुकूल निमित्त तुम्हें भी मिल जाएंगे परंतु यदि अपनी मान आदि कषायों को घटाने के लिए कर रहे हो तो वही सार्थक दान है और वही भविष्य में मोक्षमार्ग में भी सहायक होगा हमारे सच्चे देव शास्त्र गुरु हमें ऐसी ही प्रेरणा देते हैं हम सब भी सभी का मोक्षमार्ग निर्विघ्न वृद्धिगत हो ऐसी भावना से ही सभी को सहयोग करते चलें और पूर्ण सुखी होने के लक्ष्य से में आगे बढ़ें और परंपरा से निर्वाण को प्राप्त कर सच्चे सुखी हों।*_ 2026-04-11 04:32:20