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75034 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://www.google.com/maps/search/?api=1&query=23.8029457,74.1967623" target="_blank"><i class="fa fa-map-pin"></i> Location</a> 2026-04-10 16:18:51
75033 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://www.google.com/maps/search/?api=1&query=23.8029457,74.1967623" target="_blank"><i class="fa fa-map-pin"></i> Location</a> 2026-04-10 16:18:50
75032 40449730 True Jainism *??मंगल प्रभात लोढ़ा का बयान भाजपा के नेतृत्व व संघ को ख़ुश करने का राजनैतिक तिकड़म ….!*??????????मंगल प्रभात लोढ़ा मंजे हुए खिलाड़ी और विराट जानकारियों से भरे है,उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि जैन धर्म वैदिक धर्म से ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम धर्मों में सर्वाधिक प्राचीन धर्म है और उन्हें यह भी अच्छी तरह से ज्ञात है कि जैन धर्म क़ानून, वैधानिक और संवैधानिक रूप से हिन्दू धर्म याने वैदिक धर्म,ब्राह्मणवाद की वर्णवादी व्यवस्था व मनु संहिता के प्रभाव से एकदम अलग स्वतन्त्र व अस्तित्व का धर्म है. भाई लोढ़ा को यह भी ऐतिहासिक जानकारी जरूर होगी कि जैन धर्म को सदियों से मिटाने के प्रयास हुए,इसी प्रयास में वैदिकता वादियों के ढहाए गए भारी जुल्मी खूनी आतंक और भीषण जल्लादी कत्लेआम के ख़ौफ़नाक राक्षसी दमन के सामने बिना झुके लाखों लाख जैनों और हज़ारों आचार्यों व संतों ने मौत को गले लगा लिया मगर न मनुवाद को और न वैदिकता को स्वीकारा न जिन धर्म को छोड़ा.राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तीन विराट एजेण्डे को लागू करने पर आमादा है और भाजपा व उनके नेता व केन्द्र व राज्य सरकारें उसे पूरा करने के लिए प्राणपन से जूटी हुई है.संघ चाहता है कि मुस्लिम व ईसाइयों के अलावा सारे अन्य सभी धर्म हिंदू याने वैदिक धर्म में विलीन हो जाए.दूसरा देश की सत्ता वैदिक याने मनुवादी संहिता के द्वारा शासित हों और तीसरा वैदिक धर्म से अधिक प्राचीन व सनातन ओर कोई धर्म नहीं है,पूरा देश इसे अंतिम रूप से स्वीकार कर लें.इन तीनों बातों के सामने सबसे बड़ा विरोध समझों या रोड़ा समझों या उनके दावों व तथ्यों को झुठलाने वाला समझो तो वो अड़ंगा जैन धर्म ही है.बस इसी अड़ंगे को हटाने के लिए पहली बनी अटल सरकार ने संविधान में जैन धर्म को अलग अन्य पाँच स्वतंत्र अस्तित्व के धर्म की वर्णित सूची से बाहर किया,फिर नरेंद्र मोदी की सरकार ने जैन धर्म के अलग व स्वतंत्र धर्म के स्वरूप के खात्मे के साथ उसे मौत देते सदा सर्वदा के लिए उसे मिटाते दफ़न करने का बीड़ा उठाया और गुजरात विधान सभा में सरकारी बिल लाकर जैन व बौद्ध धर्म को हिन्दू धर्म की शाखा बनाने वास्ते सारी शक्ति लगा दी,वे उस समय भले ही सफल नहीं हुए मगर वे अभी भी अपने सपने साकार करने में लगे हुए अभी भी मोर्चे पर जुटे हुए है.जो व्यवहार आज लोढ़ा कर रहे है यही व्यवहार अटल जी व मोदी जी के जैन धर्म को मिटाने के हुए प्रयासों को सफल बनाने में उस युग के सारे धुरंधर व पुरोधा जैन भाजपा नेता बढ़ चढ़कर अटलजी व मोदी जी के साथ खड़े हुए जैन धर्म को हिन्दू धर्म घोषित कराने में जी जान से जुटे हुए रहे जैसे मंगल प्रभात लोढ़ा आज जैन धर्म के अस्तित्व को हिन्दू धर्म में विलीन करने पर एलानिया लगे हुए है.भाजपा जैनों द्वारा हर बार उठाई अल्पसंख्यक लाभों की माँग का पानी पी पीकर विरोध करती तो उस युग के जैन भाजपा नेता भी भाजपा के इशारे पर जमकर जैन अल्पसंख्यकता का विरोध करते हुए जैनों की भावनाओं को कुचल देने पर आमदा हो उठते. आज मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा जैनों को मिली अल्पसंख्यकता की मान्यता को खत्म करने की चाहत या माँग और उस युग के जैन भाजपाई नेताओं का जैन अल्पसंख्यकता का विरोध दोनों एक ही है,पहले विरोध पाने से रोकने का था तो अब पाए गए हक को रोकने का है.उस युग के भाजपा जैन नेता भाजपा के एजेंडे का समर्थन कर भाजपा को खुश करने के लिए उसके इशारे पर चलते थे तो आज लोढ़ा जैसे सारे भाजपा जैन नेता भी जो जैन धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व व अल्पसंख्यकता के मिले दर्जे को खत्म करने की जो बात कह रहें है वो संघ व भाजपा का एजेंडा है जिसे पूरा कर लोढ़ा भाजपा व संघ को खुश कर अपनी राजनैतिक जमीन को भाजपा में मजबूत करने व ऊपर चढ़ने के लिए जैन धर्म को बलि का बकरा बनाने तक को तैयार है.वे इसी जुगाड़ में लगे है.हाल ही में जैसलमेर में आयोजित विशाल व विराट जैन धर्म आयोजन में संघ प्रमुख आदरणीय मोहन भागवत जी को लोढ़ा जी के अथक प्रयास व पहल पर बुलाया और खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति श्री जिन मणिप्रभ सागर जी के मुँह से भी भागवत जी को खुश करने के लिए यह कहलवाया गया कि हम जैन तो हिन्दू धर्मी ही है.इतना ही नहीं जैन धर्म व्यवस्था के इतिहास में शायद यह इतना दुखद अध्याय भी पहली बार कलंक के रूप में जुड़ गया कि एक गच्छाधिपति आचार्य स्वयं कई कई कदम सामने आगे चलकर भागवतजी के स्वागत व आगीवानी करते उनके स्वागत में पलक पाँवड़े बिछाते इस कदर अपने पद व उसकी गरिमा को अपमानित बना देंगे,कोई नहीं सोच सकता, मगर ऐसा श्री मणिप्रभ सागरजी ने क्यों किया और क्या यह सब कुछ मंगल प्रभात लोढ़ा के कहने पर किया या स्वयं गच्छाधिपति ने अपने विवेक से किया,यह मामला अभी भी अनुत्तरित ही है.मगर इस घटना से हर जैनी का दिल पीड़ा से जरूर भर गया. ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ *पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.* 2026-04-10 16:17:15
75031 40449730 True Jainism *??मंगल प्रभात लोढ़ा का बयान भाजपा के नेतृत्व व संघ को ख़ुश करने का राजनैतिक तिकड़म ….!*??????????मंगल प्रभात लोढ़ा मंजे हुए खिलाड़ी और विराट जानकारियों से भरे है,उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि जैन धर्म वैदिक धर्म से ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम धर्मों में सर्वाधिक प्राचीन धर्म है और उन्हें यह भी अच्छी तरह से ज्ञात है कि जैन धर्म क़ानून, वैधानिक और संवैधानिक रूप से हिन्दू धर्म याने वैदिक धर्म,ब्राह्मणवाद की वर्णवादी व्यवस्था व मनु संहिता के प्रभाव से एकदम अलग स्वतन्त्र व अस्तित्व का धर्म है. भाई लोढ़ा को यह भी ऐतिहासिक जानकारी जरूर होगी कि जैन धर्म को सदियों से मिटाने के प्रयास हुए,इसी प्रयास में वैदिकता वादियों के ढहाए गए भारी जुल्मी खूनी आतंक और भीषण जल्लादी कत्लेआम के ख़ौफ़नाक राक्षसी दमन के सामने बिना झुके लाखों लाख जैनों और हज़ारों आचार्यों व संतों ने मौत को गले लगा लिया मगर न मनुवाद को और न वैदिकता को स्वीकारा न जिन धर्म को छोड़ा.राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तीन विराट एजेण्डे को लागू करने पर आमादा है और भाजपा व उनके नेता व केन्द्र व राज्य सरकारें उसे पूरा करने के लिए प्राणपन से जूटी हुई है.संघ चाहता है कि मुस्लिम व ईसाइयों के अलावा सारे अन्य सभी धर्म हिंदू याने वैदिक धर्म में विलीन हो जाए.दूसरा देश की सत्ता वैदिक याने मनुवादी संहिता के द्वारा शासित हों और तीसरा वैदिक धर्म से अधिक प्राचीन व सनातन ओर कोई धर्म नहीं है,पूरा देश इसे अंतिम रूप से स्वीकार कर लें.इन तीनों बातों के सामने सबसे बड़ा विरोध समझों या रोड़ा समझों या उनके दावों व तथ्यों को झुठलाने वाला समझो तो वो अड़ंगा जैन धर्म ही है.बस इसी अड़ंगे को हटाने के लिए पहली बनी अटल सरकार ने संविधान में जैन धर्म को अलग अन्य पाँच स्वतंत्र अस्तित्व के धर्म की वर्णित सूची से बाहर किया,फिर नरेंद्र मोदी की सरकार ने जैन धर्म के अलग व स्वतंत्र धर्म के स्वरूप के खात्मे के साथ उसे मौत देते सदा सर्वदा के लिए उसे मिटाते दफ़न करने का बीड़ा उठाया और गुजरात विधान सभा में सरकारी बिल लाकर जैन व बौद्ध धर्म को हिन्दू धर्म की शाखा बनाने वास्ते सारी शक्ति लगा दी,वे उस समय भले ही सफल नहीं हुए मगर वे अभी भी अपने सपने साकार करने में लगे हुए अभी भी मोर्चे पर जुटे हुए है.जो व्यवहार आज लोढ़ा कर रहे है यही व्यवहार अटल जी व मोदी जी के जैन धर्म को मिटाने के हुए प्रयासों को सफल बनाने में उस युग के सारे धुरंधर व पुरोधा जैन भाजपा नेता बढ़ चढ़कर अटलजी व मोदी जी के साथ खड़े हुए जैन धर्म को हिन्दू धर्म घोषित कराने में जी जान से जुटे हुए रहे जैसे मंगल प्रभात लोढ़ा आज जैन धर्म के अस्तित्व को हिन्दू धर्म में विलीन करने पर एलानिया लगे हुए है.भाजपा जैनों द्वारा हर बार उठाई अल्पसंख्यक लाभों की माँग का पानी पी पीकर विरोध करती तो उस युग के जैन भाजपा नेता भी भाजपा के इशारे पर जमकर जैन अल्पसंख्यकता का विरोध करते हुए जैनों की भावनाओं को कुचल देने पर आमदा हो उठते. आज मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा जैनों को मिली अल्पसंख्यकता की मान्यता को खत्म करने की चाहत या माँग और उस युग के जैन भाजपाई नेताओं का जैन अल्पसंख्यकता का विरोध दोनों एक ही है,पहले विरोध पाने से रोकने का था तो अब पाए गए हक को रोकने का है.उस युग के भाजपा जैन नेता भाजपा के एजेंडे का समर्थन कर भाजपा को खुश करने के लिए उसके इशारे पर चलते थे तो आज लोढ़ा जैसे सारे भाजपा जैन नेता भी जो जैन धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व व अल्पसंख्यकता के मिले दर्जे को खत्म करने की जो बात कह रहें है वो संघ व भाजपा का एजेंडा है जिसे पूरा कर लोढ़ा भाजपा व संघ को खुश कर अपनी राजनैतिक जमीन को भाजपा में मजबूत करने व ऊपर चढ़ने के लिए जैन धर्म को बलि का बकरा बनाने तक को तैयार है.वे इसी जुगाड़ में लगे है.हाल ही में जैसलमेर में आयोजित विशाल व विराट जैन धर्म आयोजन में संघ प्रमुख आदरणीय मोहन भागवत जी को लोढ़ा जी के अथक प्रयास व पहल पर बुलाया और खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति श्री जिन मणिप्रभ सागर जी के मुँह से भी भागवत जी को खुश करने के लिए यह कहलवाया गया कि हम जैन तो हिन्दू धर्मी ही है.इतना ही नहीं जैन धर्म व्यवस्था के इतिहास में शायद यह इतना दुखद अध्याय भी पहली बार कलंक के रूप में जुड़ गया कि एक गच्छाधिपति आचार्य स्वयं कई कई कदम सामने आगे चलकर भागवतजी के स्वागत व आगीवानी करते उनके स्वागत में पलक पाँवड़े बिछाते इस कदर अपने पद व उसकी गरिमा को अपमानित बना देंगे,कोई नहीं सोच सकता, मगर ऐसा श्री मणिप्रभ सागरजी ने क्यों किया और क्या यह सब कुछ मंगल प्रभात लोढ़ा के कहने पर किया या स्वयं गच्छाधिपति ने अपने विवेक से किया,यह मामला अभी भी अनुत्तरित ही है.मगर इस घटना से हर जैनी का दिल पीड़ा से जरूर भर गया. ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ *पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.* 2026-04-10 16:17:14
75030 40449730 True Jainism *मंगल प्रभात लोढ़ा के जैन धर्म को हिन्दू धर्म में विलीन करने की मंशा पर हिन्दू और सनातन धर्म की हकीकत पर थोड़ी चर्चा जरूरी…..!*???हिन्दू न धर्म है न संस्कृति है न कोई दर्शन व संस्कार है.जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है वो तो वास्तव में वैदिक धर्म है,वैदिक दर्शन व वैदिक संस्कृति और ब्राह्मणवादी व्यवस्था है. उसी तरह हिन्द,हिन्दू और हिंदुस्तान भारत की भौगोलिक पहचान का पर्याय मात्र है.सिंधु नदी के उस पार के देश को याने भारत को इंगित करने वाला दिया गया पहचान का विदेशी नाम है.भाषा की बोली का शाब्दिक उच्चारण ही को सी बोलने के कारण इसे सिंधु की जगह हिन्दू कहा गया है.अरब व विशेषकर मुस्लिमों ने हिन्द,हिंदू और हिंदुस्तान जैसे शब्दों को खूब अधिक जोर से प्रचारित किया.वैसे हिन्दू शब्द हमारे देश के किसी भी धार्मिक ग्रंथ और किसी भी भारतीय डिक्सनेरी का नहीं बल्कि यह विदेश से आया,लाया और भारतीयों पर जबरिया थोपा गया शब्द है.दुनिया में यह हिन्दू शब्द तो पारसी भाषा के शब्दकोष के अलावा कहीं भी नहीं मिलेगा. पारसी भाषा में यह शब्द एक भद्दी गाली और अपमानित,हेय व हिकारती कृत्य के लिए उपयुक्त होता है.उसी तरह सनातन धर्म नहीं होता बल्कि सनातन शब्द सिर्फ प्राचीनता का द्योतक होता है.अपनी अपनी प्राचीनता के दावे के साथ वैदिक व श्रमण संस्कृति को मानने वाले जैन व बौद्ध धर्म भी सनातन शब्द को सदियों से अपने धर्म के साथ जोड़े हुए है.याने हिन्दू धर्म व सनातन धर्म कोई धर्म नहीं है बल्कि इसे सिर्फ़ और सिर्फ़ वैदिक धर्म के दायरे को विराट बनाकर उसे सीमित दायरे से बाहर लाकर विशाल बनाने हेतु भारत के सारे के सारे सभी ग़ैर मुस्लिम व ईसाई धर्मों को वैदिक धर्म की ही शाखा,हिस्सा व संप्रदाय बनाते उनका मालिक बनने और वैदिक धर्म की सत्ता सब पर स्थापित करने के एक गहरे षड्यंत्र के साथ वैदिक धर्म और वर्णवादी याने ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था की पैशाचिक मान्यता के नाम पर हुए युगों के अति भयावह शोषण,भीषण दोहन व अत्याचार को छिपाते वैदिक धर्म को अब हिन्दू धर्म व सनातन धर्म के नाम पर प्रचारित कर भारत को दो भागों याने हिन्दू और मुस्लिम में बांटने का एक प्रायोजित धार्मिक वितृंडावाद,सत्ता को हड़पने का हँगामी हूस्टंड और सत्ता क़ब्ज़ाने का धारधार औजार है जो आज खूब सर चढ़कर बोल रहा है.जैन धर्म हो,बौद्ध धर्म हो या सिख धर्म या फिर दूसरी ओर अट्ठारह करोड़ सभी तरह के आदिवासी और पूर्वोत्तर राज्यों के वनवासी हो जो अपने को हिन्दू नहीं बल्कि अलग से अपने को सरन धर्मी कहते है,उसी तरह करोड़ों अंबेडकर वादी हिन्दू धर्म का विरोध करते है और करोड़ों दक्षिण के लिंगायत जो अपनी गणना अलग से करने पर जोर देते अपने को हिन्दू धर्मी नहीं मानते है,जो हिन्दू धर्म से अपनी अलग पहचान के लिए वे सैकड़ों वर्षों से खूब संघर्ष कर रहे.देश में सारी संस्कृतियों को खत्म कर वैदिक संस्कृति व मनुवादी संहिता को लादने के नाम पर समान नागरिक संहिता याने यू सी सी का विरोध सभी ग़ैर वैदिक धर्म कर रहे है मगर जैसे ही अट्ठारह करोड़ आदिवासियों व वनवासियों ने कहा कि अगर हमारी संस्कृति को मिटाने के लिए हम पर यू सी सी लादा गया तो न केवल हम मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकेंगे बल्कि अलग से हम आदिवासी राष्ट्र की मांग करेंगे क्योंकि हम हिन्दू धर्मी नहीं बल्कि हमारा धर्म अलग से सरन धर्म है,उसकी अलग पहचान है,उनकी धमकी के बाद आदिवासियों को यू सी सी से अलग रखने पर मोदी सरकार ने घुटने टेक लिए है. *महाराष्ट्र के क़ाबिना मंत्री भाई मंगल प्रभात लोढ़ा ने जैन धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व को मिटाते उसे हिन्दू धर्म में विलीन करने और जैनों के* *अल्पसंख्यक के मिले वैधानिक व संवैधानिक अधिकारों के खात्मे की जो ख़तरनाक चाहत रखी है,उनके इस आत्मघाती चाहना पर चर्चा अगले लेख में…!*✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ *पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.* 2026-04-10 16:17:12
75029 40449730 True Jainism *मंगल प्रभात लोढ़ा के जैन धर्म को हिन्दू धर्म में विलीन करने की मंशा पर हिन्दू और सनातन धर्म की हकीकत पर थोड़ी चर्चा जरूरी…..!*???हिन्दू न धर्म है न संस्कृति है न कोई दर्शन व संस्कार है.जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है वो तो वास्तव में वैदिक धर्म है,वैदिक दर्शन व वैदिक संस्कृति और ब्राह्मणवादी व्यवस्था है. उसी तरह हिन्द,हिन्दू और हिंदुस्तान भारत की भौगोलिक पहचान का पर्याय मात्र है.सिंधु नदी के उस पार के देश को याने भारत को इंगित करने वाला दिया गया पहचान का विदेशी नाम है.भाषा की बोली का शाब्दिक उच्चारण ही को सी बोलने के कारण इसे सिंधु की जगह हिन्दू कहा गया है.अरब व विशेषकर मुस्लिमों ने हिन्द,हिंदू और हिंदुस्तान जैसे शब्दों को खूब अधिक जोर से प्रचारित किया.वैसे हिन्दू शब्द हमारे देश के किसी भी धार्मिक ग्रंथ और किसी भी भारतीय डिक्सनेरी का नहीं बल्कि यह विदेश से आया,लाया और भारतीयों पर जबरिया थोपा गया शब्द है.दुनिया में यह हिन्दू शब्द तो पारसी भाषा के शब्दकोष के अलावा कहीं भी नहीं मिलेगा. पारसी भाषा में यह शब्द एक भद्दी गाली और अपमानित,हेय व हिकारती कृत्य के लिए उपयुक्त होता है.उसी तरह सनातन धर्म नहीं होता बल्कि सनातन शब्द सिर्फ प्राचीनता का द्योतक होता है.अपनी अपनी प्राचीनता के दावे के साथ वैदिक व श्रमण संस्कृति को मानने वाले जैन व बौद्ध धर्म भी सनातन शब्द को सदियों से अपने धर्म के साथ जोड़े हुए है.याने हिन्दू धर्म व सनातन धर्म कोई धर्म नहीं है बल्कि इसे सिर्फ़ और सिर्फ़ वैदिक धर्म के दायरे को विराट बनाकर उसे सीमित दायरे से बाहर लाकर विशाल बनाने हेतु भारत के सारे के सारे सभी ग़ैर मुस्लिम व ईसाई धर्मों को वैदिक धर्म की ही शाखा,हिस्सा व संप्रदाय बनाते उनका मालिक बनने और वैदिक धर्म की सत्ता सब पर स्थापित करने के एक गहरे षड्यंत्र के साथ वैदिक धर्म और वर्णवादी याने ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था की पैशाचिक मान्यता के नाम पर हुए युगों के अति भयावह शोषण,भीषण दोहन व अत्याचार को छिपाते वैदिक धर्म को अब हिन्दू धर्म व सनातन धर्म के नाम पर प्रचारित कर भारत को दो भागों याने हिन्दू और मुस्लिम में बांटने का एक प्रायोजित धार्मिक वितृंडावाद,सत्ता को हड़पने का हँगामी हूस्टंड और सत्ता क़ब्ज़ाने का धारधार औजार है जो आज खूब सर चढ़कर बोल रहा है.जैन धर्म हो,बौद्ध धर्म हो या सिख धर्म या फिर दूसरी ओर अट्ठारह करोड़ सभी तरह के आदिवासी और पूर्वोत्तर राज्यों के वनवासी हो जो अपने को हिन्दू नहीं बल्कि अलग से अपने को सरन धर्मी कहते है,उसी तरह करोड़ों अंबेडकर वादी हिन्दू धर्म का विरोध करते है और करोड़ों दक्षिण के लिंगायत जो अपनी गणना अलग से करने पर जोर देते अपने को हिन्दू धर्मी नहीं मानते है,जो हिन्दू धर्म से अपनी अलग पहचान के लिए वे सैकड़ों वर्षों से खूब संघर्ष कर रहे.देश में सारी संस्कृतियों को खत्म कर वैदिक संस्कृति व मनुवादी संहिता को लादने के नाम पर समान नागरिक संहिता याने यू सी सी का विरोध सभी ग़ैर वैदिक धर्म कर रहे है मगर जैसे ही अट्ठारह करोड़ आदिवासियों व वनवासियों ने कहा कि अगर हमारी संस्कृति को मिटाने के लिए हम पर यू सी सी लादा गया तो न केवल हम मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकेंगे बल्कि अलग से हम आदिवासी राष्ट्र की मांग करेंगे क्योंकि हम हिन्दू धर्मी नहीं बल्कि हमारा धर्म अलग से सरन धर्म है,उसकी अलग पहचान है,उनकी धमकी के बाद आदिवासियों को यू सी सी से अलग रखने पर मोदी सरकार ने घुटने टेक लिए है. *महाराष्ट्र के क़ाबिना मंत्री भाई मंगल प्रभात लोढ़ा ने जैन धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व को मिटाते उसे हिन्दू धर्म में विलीन करने और जैनों के* *अल्पसंख्यक के मिले वैधानिक व संवैधानिक अधिकारों के खात्मे की जो ख़तरनाक चाहत रखी है,उनके इस आत्मघाती चाहना पर चर्चा अगले लेख में…!*✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ *पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.* 2026-04-10 16:17:11
75028 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-10 16:16:25
75027 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-10 16:16:24
75025 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 *ईरान अमेरिका युद्ध* ??? 2026-04-10 16:14:47
75026 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 *ईरान अमेरिका युद्ध* ??? 2026-04-10 16:14:47