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73664 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ??वंदामी माताजी?? ???????????? 2026-04-10 07:03:30
73663 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ??वंदामी माताजी?? ???????????? 2026-04-10 07:03:29
73661 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-04-10 07:01:33
73662 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-04-10 07:01:33
73659 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-04-10 07:01:31
73660 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-04-10 07:01:31
73658 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ ಶುಭೋದಯ ಶುಭ ಸುಪ್ರಭಾತ ಎಲ್ಲ ಗ್ರೂಪ್ ಸ್ನೇಹಿತರಿಗೆ. ಓಂ ಣಮೋ ಅರ್ಹತೇ ಭಗವತೇ ಶ್ರೀಮತೇ ಪುಷ್ಪದಂತ ತೀರ್ಥಂಕರಾಯ ಅಜಿತ ಯಕ್ಷ ಮಹಾಕಾಳಿ ಯಕ್ಷೀ ಸಹಿತಾಯ ಶುಕ್ರ ಮಹಾಗ್ರಹ ದೇವಃ ಸರ್ವ ಶಾಂತಿಂ ಕುರು ಕುರು ಸ್ವಾಹಾ. ಓಂ ಣಮೋ ಅರ್ಹತೇ ಭಗವತೇ ಶ್ರೀಮತೇ ಪಾರ್ಶ್ವನಾಥ ತೀರ್ಥಂಕರಾಯ ಧರಣೇಂದ್ರ ಯಕ್ಷ ಪದ್ಮಾವತಿ ಯಕ್ಷೀ ಸಹಿತಾಯ ಕೇತು ಮಹಾಗ್ರಹ ದೇವಃ ಸರ್ವ ಶಾಂತಿಂ ಕುರು ಕುರು ಸ್ವಾಹಾ. 2026-04-10 07:01:28
73657 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ ಶುಭೋದಯ ಶುಭ ಸುಪ್ರಭಾತ ಎಲ್ಲ ಗ್ರೂಪ್ ಸ್ನೇಹಿತರಿಗೆ. ಓಂ ಣಮೋ ಅರ್ಹತೇ ಭಗವತೇ ಶ್ರೀಮತೇ ಪುಷ್ಪದಂತ ತೀರ್ಥಂಕರಾಯ ಅಜಿತ ಯಕ್ಷ ಮಹಾಕಾಳಿ ಯಕ್ಷೀ ಸಹಿತಾಯ ಶುಕ್ರ ಮಹಾಗ್ರಹ ದೇವಃ ಸರ್ವ ಶಾಂತಿಂ ಕುರು ಕುರು ಸ್ವಾಹಾ. ಓಂ ಣಮೋ ಅರ್ಹತೇ ಭಗವತೇ ಶ್ರೀಮತೇ ಪಾರ್ಶ್ವನಾಥ ತೀರ್ಥಂಕರಾಯ ಧರಣೇಂದ್ರ ಯಕ್ಷ ಪದ್ಮಾವತಿ ಯಕ್ಷೀ ಸಹಿತಾಯ ಕೇತು ಮಹಾಗ್ರಹ ದೇವಃ ಸರ್ವ ಶಾಂತಿಂ ಕುರು ಕುರು ಸ್ವಾಹಾ. 2026-04-10 07:01:27
73655 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) *जी हाँ !* जितने नियम शास्त्र में नही है उससे ज्यादा नियम तो लोगों ने मंदिरों में बना दिये मत-मान्यताओं के। *"मंदिर"* शांति का स्थान था, उसे *अहं* का अड्डा बना दिया है और आये दिन झगड़े करते रहते है। *कहीं* अभिषेक-पूजन-शांतिधारा, तो कहीं गंधोदक को लेकर, *कहीं* माताओं-बहनों को तो *कहीं* साधुओं को लेकर ऐसे ऐसे नियम बना दिये जिनका *शास्त्रों में कोई उल्लेख ही नही है।* *समाज* में भगवान सभी के है, सभी को समान अवसर दिया जाए, जो शास्त्र में बातें लिखी है उस आधार पर व्यवस्था बनाई जाए। अपनी मन मर्जी से मंदिरों को *मिथ्यात्व* का अड्डा न बनाया जाए। ॐ।। 2026-04-10 06:59:58
73656 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) *जी हाँ !* जितने नियम शास्त्र में नही है उससे ज्यादा नियम तो लोगों ने मंदिरों में बना दिये मत-मान्यताओं के। *"मंदिर"* शांति का स्थान था, उसे *अहं* का अड्डा बना दिया है और आये दिन झगड़े करते रहते है। *कहीं* अभिषेक-पूजन-शांतिधारा, तो कहीं गंधोदक को लेकर, *कहीं* माताओं-बहनों को तो *कहीं* साधुओं को लेकर ऐसे ऐसे नियम बना दिये जिनका *शास्त्रों में कोई उल्लेख ही नही है।* *समाज* में भगवान सभी के है, सभी को समान अवसर दिया जाए, जो शास्त्र में बातें लिखी है उस आधार पर व्यवस्था बनाई जाए। अपनी मन मर्जी से मंदिरों को *मिथ्यात्व* का अड्डा न बनाया जाए। ॐ।। 2026-04-10 06:59:58