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73465 42131354 जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन डिजिटल पुस्तक शीर्षक: "सम्राट खारवेल का ऐतिहासिक शिलालेख" हाथीगुम्फा-अभिलेख, मूलपाठ, भावानुवाद एवं तथ्यात्मक-विवेचन | (कुल पृष्ठ-49) पोस्ट: <a href="https://www.youtube.com/post/UgkxoRh9oHcCgivZvy4OPGBTeqlHX0KuoLO8" target="_blank">https://www.youtube.com/post/UgkxoRh9oHcCgivZvy4OPGBTeqlHX0KuoLO8</a> 2026-04-10 05:35:08
73466 42131354 जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन डिजिटल पुस्तक शीर्षक: "सम्राट खारवेल का ऐतिहासिक शिलालेख" हाथीगुम्फा-अभिलेख, मूलपाठ, भावानुवाद एवं तथ्यात्मक-विवेचन | (कुल पृष्ठ-49) पोस्ट: <a href="https://www.youtube.com/post/UgkxoRh9oHcCgivZvy4OPGBTeqlHX0KuoLO8" target="_blank">https://www.youtube.com/post/UgkxoRh9oHcCgivZvy4OPGBTeqlHX0KuoLO8</a> 2026-04-10 05:35:08
73463 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन डिजिटल पुस्तक शीर्षक: "सम्राट खारवेल का ऐतिहासिक शिलालेख" हाथीगुम्फा-अभिलेख, मूलपाठ, भावानुवाद एवं तथ्यात्मक-विवेचन | (कुल पृष्ठ-49) पोस्ट: <a href="https://www.youtube.com/post/UgkxoRh9oHcCgivZvy4OPGBTeqlHX0KuoLO8" target="_blank">https://www.youtube.com/post/UgkxoRh9oHcCgivZvy4OPGBTeqlHX0KuoLO8</a> 2026-04-10 05:35:05
73464 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन डिजिटल पुस्तक शीर्षक: "सम्राट खारवेल का ऐतिहासिक शिलालेख" हाथीगुम्फा-अभिलेख, मूलपाठ, भावानुवाद एवं तथ्यात्मक-विवेचन | (कुल पृष्ठ-49) पोस्ट: <a href="https://www.youtube.com/post/UgkxoRh9oHcCgivZvy4OPGBTeqlHX0KuoLO8" target="_blank">https://www.youtube.com/post/UgkxoRh9oHcCgivZvy4OPGBTeqlHX0KuoLO8</a> 2026-04-10 05:35:05
73461 47534159 Maharstra (kartick) *आत्मचिंतन - (नं. 2581)* ************************** *9 अप्रैल* *विश्व णमोकार महामंत्र दिवस* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (भाग *2* ) """""""""""""""""""""""" जैन धर्म में सबसे मुख्य मंत्र *णमोकार महामंत्र* है, और हर साल 9 अप्रैल को *विश्व णमोकार महामंत्र दिवस* के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर, हम इस *णमोकार महामंत्र* के बारे में कुछ जानकारी ले रहे हैं.. 1) णमोकार महामंत्र *अनादी - शाश्वत* है। 2) णमोकार महामंत्र के कुछ दूसरे नाम हैं जैसे *अपराजित मंत्र, महन्मंगल मंत्र, मोक्ष मंत्र, मूल मंत्र, बीज मंत्र*। 3) णमोकार महामंत्र में, शुरुवात करते समय, वे सभी को जो सिद्ध शीला पर विराजमान हैं, उन् सिद्ध परमेष्ठीयोंको तीन बार प्रणाम किया जाता है। 4) अब तक के सभी *अरिहंत परमेष्ठी, सिद्ध परमेष्ठी* को प्रणाम करने के बाद, सभी ( आइरियाणं का मतलब है ) *आचार्य परमेष्ठी*, जो अब तक हो चुके हैं और अभी मौजूद हैं, सभी (उवज्झायाणं का मतलब है) *उपाध्याय परमेष्ठी* और लोगों में से सभी (लोएसव्वसाहूणं का मतलब है) *साधु परमेष्ठी* को प्रणाम किया है। *(क्रमशः) (ता. 10 अप्रैल 2026)* *--डॉ.अजीत जे.पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र* ??? (कु.9624/आ.3240) 2026-04-10 05:34:07
73462 47534159 Maharstra (kartick) *आत्मचिंतन - (नं. 2581)* ************************** *9 अप्रैल* *विश्व णमोकार महामंत्र दिवस* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (भाग *2* ) """""""""""""""""""""""" जैन धर्म में सबसे मुख्य मंत्र *णमोकार महामंत्र* है, और हर साल 9 अप्रैल को *विश्व णमोकार महामंत्र दिवस* के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर, हम इस *णमोकार महामंत्र* के बारे में कुछ जानकारी ले रहे हैं.. 1) णमोकार महामंत्र *अनादी - शाश्वत* है। 2) णमोकार महामंत्र के कुछ दूसरे नाम हैं जैसे *अपराजित मंत्र, महन्मंगल मंत्र, मोक्ष मंत्र, मूल मंत्र, बीज मंत्र*। 3) णमोकार महामंत्र में, शुरुवात करते समय, वे सभी को जो सिद्ध शीला पर विराजमान हैं, उन् सिद्ध परमेष्ठीयोंको तीन बार प्रणाम किया जाता है। 4) अब तक के सभी *अरिहंत परमेष्ठी, सिद्ध परमेष्ठी* को प्रणाम करने के बाद, सभी ( आइरियाणं का मतलब है ) *आचार्य परमेष्ठी*, जो अब तक हो चुके हैं और अभी मौजूद हैं, सभी (उवज्झायाणं का मतलब है) *उपाध्याय परमेष्ठी* और लोगों में से सभी (लोएसव्वसाहूणं का मतलब है) *साधु परमेष्ठी* को प्रणाम किया है। *(क्रमशः) (ता. 10 अप्रैल 2026)* *--डॉ.अजीत जे.पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र* ??? (कु.9624/आ.3240) 2026-04-10 05:34:07
73460 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी * *कोई आप की वजह से मुस्कराये.....* *ऐसा दिन जिंदगी में* *रोज आए.....* *गुरु मां मेरी पहचान* 2026-04-10 05:32:30
73459 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी * *कोई आप की वजह से मुस्कराये.....* *ऐसा दिन जिंदगी में* *रोज आए.....* *गुरु मां मेरी पहचान* 2026-04-10 05:32:29
73458 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा <a href="https://youtube.com/live/fYsHq1DKlx8?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/fYsHq1DKlx8?feature=share</a> _*?53#शुद्धनिश्चयनयसे अर्हन्त, सिद्धभगवान अपने२ शुद्धपर्याय के कर्ता और परमशुद्धनिश्चयनयसे अर्हन्त-सिद्धप्रभु सहित सभी जीव अकर्ता-इस स्यात् कर्ता-अकर्ता रुप अनेकान्त से नित्यार्थक्रियाका अभाव निजध्रुवशुद्धप्रभु में कैसे सिद्ध होता हैं? इस अनेकान्त के सम्यक् परिज्ञान से ही मुक्तीसुंदरी की प्राप्ति सहज सुलभ कैसे?-पं.अनिलजी, पुणे।*_ *#गाथा सूत्र२७?जितना आकाश अविभागी पुद्गलाणु से रोका जाता है उसे सर्व अणुओंको स्थान देनेमें योग्य प्रदेश जानो।* *#अनादि-अनंत अविनश्वर निजध्रुवशुद्ध प्रभु में नित्यार्थक्रिया की कल्पना वाले जीव नियमसे परम आनंदमय सुखामृतके रसास्वादसे पराङ्गमुख बहिरात्मा ही होते हैं। ?वे आस्त्रव,बंध, पाप और पापानुबंधी पुण्यादि के अनुपचरित असद्भूत व्यवहार नयसे कर्ता हैं।* *#अन्तरात्मा-उक्त बहिरात्मा से विलक्षण लक्षणवाले सम्यग्दृष्टि जीव को द्रव्यरुप, संवर, निर्जरा और मोक्ष पदार्थका कर्तृत्व अनुपचरित असद्भूत व्यवहारनयसे हैं, और जीवभाव पर्यायरुप संवर-निर्जरा-मोक्ष पदार्थोंका कर्तृत्व विवक्षित एकदेश शुद्धनिश्चयनयसे है।* *#परमशुद्धनिश्चयनयसे ? सभी जीव नित्यानित्यार्थक्रियारहित होनेसे ना उत्पन्न होते हैं नाही मरते हैं, तथा नाही बंध-मोक्ष करते हैं। इस वचनसे जन्म, मरण, बंधमोक्ष से रहित हैं।* *#बृहद-द्रव्यसंग्रह गाथा सूत्र २७ पृष्ठ क्रं ९५ से ९६।* 2026-04-10 05:31:27
73457 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा <a href="https://youtube.com/live/fYsHq1DKlx8?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/fYsHq1DKlx8?feature=share</a> _*?53#शुद्धनिश्चयनयसे अर्हन्त, सिद्धभगवान अपने२ शुद्धपर्याय के कर्ता और परमशुद्धनिश्चयनयसे अर्हन्त-सिद्धप्रभु सहित सभी जीव अकर्ता-इस स्यात् कर्ता-अकर्ता रुप अनेकान्त से नित्यार्थक्रियाका अभाव निजध्रुवशुद्धप्रभु में कैसे सिद्ध होता हैं? इस अनेकान्त के सम्यक् परिज्ञान से ही मुक्तीसुंदरी की प्राप्ति सहज सुलभ कैसे?-पं.अनिलजी, पुणे।*_ *#गाथा सूत्र२७?जितना आकाश अविभागी पुद्गलाणु से रोका जाता है उसे सर्व अणुओंको स्थान देनेमें योग्य प्रदेश जानो।* *#अनादि-अनंत अविनश्वर निजध्रुवशुद्ध प्रभु में नित्यार्थक्रिया की कल्पना वाले जीव नियमसे परम आनंदमय सुखामृतके रसास्वादसे पराङ्गमुख बहिरात्मा ही होते हैं। ?वे आस्त्रव,बंध, पाप और पापानुबंधी पुण्यादि के अनुपचरित असद्भूत व्यवहार नयसे कर्ता हैं।* *#अन्तरात्मा-उक्त बहिरात्मा से विलक्षण लक्षणवाले सम्यग्दृष्टि जीव को द्रव्यरुप, संवर, निर्जरा और मोक्ष पदार्थका कर्तृत्व अनुपचरित असद्भूत व्यवहारनयसे हैं, और जीवभाव पर्यायरुप संवर-निर्जरा-मोक्ष पदार्थोंका कर्तृत्व विवक्षित एकदेश शुद्धनिश्चयनयसे है।* *#परमशुद्धनिश्चयनयसे ? सभी जीव नित्यानित्यार्थक्रियारहित होनेसे ना उत्पन्न होते हैं नाही मरते हैं, तथा नाही बंध-मोक्ष करते हैं। इस वचनसे जन्म, मरण, बंधमोक्ष से रहित हैं।* *#बृहद-द्रव्यसंग्रह गाथा सूत्र २७ पृष्ठ क्रं ९५ से ९६।* 2026-04-10 05:31:26