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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Date |
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40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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2026-04-12 06:31:38 |
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| 78770 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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2026-04-12 06:31:38 |
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| 78767 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-12 06:31:04 |
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| 78768 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-12 06:31:04 |
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| 78766 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*“कल्याण के मार्ग पर चलने वाला कभी नष्ट नहीं होता”*
“न हि कल्याणकृत्कश्चिद् दुर्गतिं तात गच्छति।” यह एक छोटा सा श्लोक है, लेकिन इसके भीतर जीवन का बहुत बड़ा सत्य छिपा हुआ है। इसका सीधा और सरल अर्थ है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से अच्छे कर्म करता है, जो दूसरों के हित में सोचता है, जो धर्म और सत्य के मार्ग पर चलता है—वह कभी भी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता। आज के समय में जब हम चारों ओर देखते हैं तो कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि जो लोग छल, कपट और बेईमानी करते हैं, वही आगे बढ़ रहे हैं और जो सच्चे और ईमानदार हैं, वे संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सच में अच्छे कर्मों का कोई फल मिलता भी है या नहीं। लेकिन यह श्लोक हमें यही समझाता है कि जीवन का गणित इतना सीधा नहीं है कि आज किया और आज ही परिणाम मिल गया। कर्म का फल निश्चित है, पर उसका समय निश्चित नहीं होता। जो व्यक्ति कल्याण के मार्ग पर चलता है, उसका हर एक अच्छा कार्य कहीं न कहीं संचित होता रहता है और समय आने पर वही उसके जीवन में सुख, शांति और सम्मान के रूप में प्रकट होता है। हो सकता है कि कुछ समय के लिए उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़े, लोग उसका मजाक उड़ाएं, उसे कमजोर समझें, लेकिन अंततः जीत उसी की होती है जो सही रास्ते पर अडिग रहता है। यह श्लोक हमें धैर्य रखने की सीख देता है, यह बताता है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अपने अच्छे कर्मों को कभी मत छोड़ो। क्योंकि जब व्यक्ति अपने सिद्धांतों से समझौता कर लेता है, तभी उसकी असली हार होती है। सच्चा विजेता वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने धर्म और नैतिकता को बनाए रखे। आज समाज को सबसे अधिक आवश्यकता इसी सोच की है, जहाँ लोग तात्कालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक कल्याण को समझें। अगर हर व्यक्ति यह निश्चय कर ले कि उसे सिर्फ सही काम करना है, चाहे कोई देखे या न देखे, चाहे कोई सराहे या न सराहे, तो समाज अपने आप बदल जाएगा। इसलिए जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएं, यह विश्वास कभी नहीं टूटना चाहिए कि अच्छे कर्मों का परिणाम कभी बुरा नहीं हो सकता। अंततः सत्य की ही विजय होती है और जो कल्याण के मार्ग पर चलता है, वह कभी भी पतन को प्राप्त नहीं होता।
नितिन जैन, संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा), जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल, मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-12 06:29:27 |
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| 78765 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*“कल्याण के मार्ग पर चलने वाला कभी नष्ट नहीं होता”*
“न हि कल्याणकृत्कश्चिद् दुर्गतिं तात गच्छति।” यह एक छोटा सा श्लोक है, लेकिन इसके भीतर जीवन का बहुत बड़ा सत्य छिपा हुआ है। इसका सीधा और सरल अर्थ है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से अच्छे कर्म करता है, जो दूसरों के हित में सोचता है, जो धर्म और सत्य के मार्ग पर चलता है—वह कभी भी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता। आज के समय में जब हम चारों ओर देखते हैं तो कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि जो लोग छल, कपट और बेईमानी करते हैं, वही आगे बढ़ रहे हैं और जो सच्चे और ईमानदार हैं, वे संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सच में अच्छे कर्मों का कोई फल मिलता भी है या नहीं। लेकिन यह श्लोक हमें यही समझाता है कि जीवन का गणित इतना सीधा नहीं है कि आज किया और आज ही परिणाम मिल गया। कर्म का फल निश्चित है, पर उसका समय निश्चित नहीं होता। जो व्यक्ति कल्याण के मार्ग पर चलता है, उसका हर एक अच्छा कार्य कहीं न कहीं संचित होता रहता है और समय आने पर वही उसके जीवन में सुख, शांति और सम्मान के रूप में प्रकट होता है। हो सकता है कि कुछ समय के लिए उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़े, लोग उसका मजाक उड़ाएं, उसे कमजोर समझें, लेकिन अंततः जीत उसी की होती है जो सही रास्ते पर अडिग रहता है। यह श्लोक हमें धैर्य रखने की सीख देता है, यह बताता है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अपने अच्छे कर्मों को कभी मत छोड़ो। क्योंकि जब व्यक्ति अपने सिद्धांतों से समझौता कर लेता है, तभी उसकी असली हार होती है। सच्चा विजेता वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने धर्म और नैतिकता को बनाए रखे। आज समाज को सबसे अधिक आवश्यकता इसी सोच की है, जहाँ लोग तात्कालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक कल्याण को समझें। अगर हर व्यक्ति यह निश्चय कर ले कि उसे सिर्फ सही काम करना है, चाहे कोई देखे या न देखे, चाहे कोई सराहे या न सराहे, तो समाज अपने आप बदल जाएगा। इसलिए जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएं, यह विश्वास कभी नहीं टूटना चाहिए कि अच्छे कर्मों का परिणाम कभी बुरा नहीं हो सकता। अंततः सत्य की ही विजय होती है और जो कल्याण के मार्ग पर चलता है, वह कभी भी पतन को प्राप्त नहीं होता।
नितिन जैन, संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा), जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल, मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-12 06:29:26 |
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| 78761 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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? आप सभी को सादर जय जिनेंद्र? ? आज का दिन शुभ एवं मंगलमय हो? ☎️?"व्हाट्सएप नंबर"-9977608466? श्री सकल दिगम्बर जैन समाज समिति का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-12 06:28:22 |
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| 78762 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-12 06:28:22 |
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| 78763 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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2026-04-12 06:28:22 |
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| 78764 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-12 06:28:22 |
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